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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Rainwater will seep into the ground; preparations are underway to save every drop

Delhi NCR News: बारिश का पानी जमीन में उतरेगा, हर बूंद बचाने की तैयारी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 30 Aug 2026 04:34 PM IST
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मास्टर प्लान-2047 में छतों, पार्कों, झीलों, सड़कों और यमुना के बाढ़ क्षेत्र को भूजल पुनर्भरण से जोड़ने का खाका
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में लगातार बढ़ते जल संकट से निपटने के लिए मास्टर प्लान-2047 में भूजल स्तर सुधारने और बारिश के पानी के बेहतर इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया है। योजना के तहत बारिश के पानी को तेजी से बहाकर बाहर निकालने के बजाय उसे अलग-अलग स्थानों पर रोककर जमीन में उतारने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके लिए बारिश की नालियों में छोटे बांध और कृत्रिम पुनर्भरण ढांचे बनाने के साथ छतों, पार्कों, झीलों, सड़कों और यमुना के बाढ़ क्षेत्र को भी भूजल पुनर्भरण से जोड़ा जाएगा।
मास्टर प्लान में केंद्रीय भूजल बोर्ड के आकलन के अनुसार दिल्ली में बारिश के पानी के बहाव की संभावित मात्रा 175 एमसीएम यानी 38,546 मिलियन गैलन प्रतिवर्ष है। इसमें से 24.39 एमसीएम (5,372 मिलियन गैलन) पानी ऐसे क्षेत्रों में उपलब्ध है, जिसका इस्तेमाल भूजल पुनर्भरण के लिए किया जा सकता है। वहीं, इमारतों की छतों से बारिश के पानी को संग्रहित करने की संभावित क्षमता 14.69 एमसीएम यानी 32,360 लाख गैलन प्रतिवर्ष आंकी गई है।
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नई इमारतों में पानी बचाने की व्यवस्था
मास्टर प्लान के अनुसार भूमि एकत्रीकरण और अन्य नए विकास क्षेत्रों में योजना और भवन डिजाइन के स्तर पर पानी बचाने की व्यवस्था अनिवार्य रूप से शामिल की जाएगी। इन क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति पानी की जरूरत को 40 गैलन प्रतिदिन तक सीमित रखने का लक्ष्य है। पुनर्विकास और सार्वजनिक परिवहन आधारित विकास योजनाओं में मौजूदा 60 गैलन से घटाकर 50 गैलन प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है। नई इमारतों में कम पानी खर्च करने वाले नल और अन्य जल उपकरण लगाने का भी प्रावधान है।
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रिज से यमुना बाढ़ क्षेत्र तक भूजल बढ़ाने की तैयारी
भूजल पुनर्भरण के दायरे में रिज क्षेत्र में छोटे बांध और नाला बांध, संस्थागत व व्यावसायिक भवनों में छत के पानी का संचयन, सोखने वाले तालाब, झील क्षेत्र, भूजल भंडारण व पुनर्प्राप्ति कुएं, पार्क और बगीचे शामिल किए जाएंगे। इसके अलावा फ्लाईओवर, शहर की सड़कें और यमुना का बाढ़ क्षेत्र भी पुनर्भरण व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।
बारिश के पानी की निकासी व्यवस्था भी होगी मजबूत
मास्टर प्लान में भूजल पुनर्भरण के साथ जल निकासी नेटवर्क को मजबूत करने की भी योजना है। दिल्ली के प्राकृतिक और निर्मित नालों का नेटवर्क नजफगढ़, ट्रांस-यमुना और बारापुला जल निकासी क्षेत्रों में फैला है। योजना में नालों, आर्द्रभूमि, झीलों, जलाशयों और यमुना के बाढ़ क्षेत्र के संरक्षण व सुधार का प्रस्ताव है, ताकि बारिश के पानी की निकासी के साथ प्राकृतिक जल तंत्र भी मजबूत हो।

तालाब और झीलों को भी भूजल से जोड़ा जाएगा
पुराने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के साथ ऐसे तालाब और झील विकसित किए जाएंगे, जो भूजल पुनर्भरण में मदद करें। जलाशयों और झीलों के पुनरुद्धार के अलावा नए पुनर्भरण तालाब और झील विकसित करने का भी प्रस्ताव है।
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