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पहले इस नाम से जानी जाती थी दिल्ली, कैसे बनी राजधानी और वर्षों में कैसे बदलता गया नाम

Mon, 22 Jun 2020 10:31 AM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्राची प्रियम Updated Mon, 22 Jun 2020 10:31 AM IST
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History of Delhi how it became capital from Indraprastha Maurya dynasty Tomar vansh
इंडिया गेट - फोटो : Social media
राजधानी दिल्ली इन दिनों कोरोना महामारी से जूझ रही है। चीन से निकलकर दुनिया भर में फैले इस वायरस का असर हमारे देश के अन्य हिस्सों में तो है ही, लेकिन दिल्ली बुरी तरह से इसकी चपेट में आ गई है। राजधानी में प्रतिदिन बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित मरीज सामने आ रहे हैं। पिछले दो दिनों से तो रिकॉर्ड 3000 से भी अधिक मरीजों ने चिंता बढ़ा दी है। दिन रात दिल्ली में कोरोना की चर्चा के कारण लोगों का मानसिक तनाव भी बढ़ रहा है। दिल्ली देश की राजधानी है, इसलिए भी सबकी नजर यहां टिकी हुई है। आइए आज बात करते हैं दिल्ली के कुछ दिलचस्प इतिहास की। दिल्ली कैसे बसी और इसका नाम 'दिल्ली' कैसे रखा गया, इस बारे में जानने के लिए पढ़ें अगली स्लाइड-
History of Delhi how it became capital from Indraprastha Maurya dynasty Tomar vansh
qutub minar - फोटो : qutub minar
दिल्ली के पुराने नाम का जिक्र सबसे पहले पौराणिक काल में पाया जाता है। सबसे पहले पांडवों ने दिल्ली को इंद्रप्रस्थ के नाम से बसाया था। यह उस समय यह पांडवों की राजधानी थी। दिल्ली का नाम इंद्रप्रस्थ से दिल्ली कैसे पड़ा इसे लेकर भी कई कहानियां है। आइए जानते हैं आज 'नई दिल्ली' के नाम से जानी जाने वाली राष्ट्रीय राजधानी के पीछे की कहानी...

 
History of Delhi how it became capital from Indraprastha Maurya dynasty Tomar vansh
Red Fort
दिल्ली नाम को लेकर एक कहानी है जो सबसे ज्यादा प्रचलित है। वो है कि ईसा पूर्व 50 में एक मौर्य राजा थे धिल्लु। उन्हें दिलु भी कहा जाता था। ऐसा कहा जाता है कि धिल्लु का अपभ्रंश होकर बाद में दिल्ली हो गया। एक तर्क यह भी दिया जाता है कि तोमरवंश के राजा धव ने इलाके का नाम ढीली रख दिया था। उनके ऐसा करने कि वजह बड़ी ही अजीबोगरीब बताई जाती है। ऐसा माना जाता है कि किले के अंदर लोहे का खंभा ढीला था। इस लिए उन्होंने इलाके का नाम ढीली रख दिया। यही ढीली शब्द बाद में दिल्ली हो गया।

 
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History of Delhi how it became capital from Indraprastha Maurya dynasty Tomar vansh
इंडिया गेट - फोटो : अमर उजाला
इतिहासकारों के बीच एक कहानी यह भी प्रचलित है कि तोमरवंश के दौरान जो सिक्के बनाए जाते थे, उन सिक्कों को देहलीवाल कहा जाता था। इसी से शहर का नाम दिल्ली हो गया। कुछ इतिहासकार ऐसा भी मानते हैं कि पहले के समय में दिल्ली के इलाके को हिंदुस्तान की दहलीज माना जाता था। यह दहलीज बाद में दिल्ली हो गई।

 
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History of Delhi how it became capital from Indraprastha Maurya dynasty Tomar vansh
राज घाट - फोटो : सोशल मीडिया
मौर्य सम्राट दिलु को लेकर कई दावे किए जाते हैं। एक धारणा के मुताबिक उनके सिंहासन के सामने एक कील थी, इस कील के बारे में कहा जाता था कि यह कील पाताल तक पहुंच गई है। राज्य के ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि जब तक यह कील है, तब तक मौर्य साम्राज्य का राज रहेगा। पूरी कहानी अगली स्लाइड में...

 
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