बदलती लाइफ स्टाइल से हेपेटाइटिस के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। डॉक्टर इसकी वजह एक मशीनों से कई का टैटू बनवाना, दूषित पानी, खानपान और शराब का अत्यधिक सेवन बता रहे हैं।
शुक्रवार को हेपेटाइटिस डे है। फोर्टिस अस्पताल के डॉ. अजय भल्ला ने बताया कि इस बीमारी की गंभीरता संक्रमित व्यक्ति की उम्र पर भी निर्भर करती है। नवजात शिशुओं में एक साल के होने से पहले संक्रमण हो, तो उनमें से 80 से 90 फीसदी बच्चों में इसका गंभीर रूप देखने को मिलता है।
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फिल ह्यूज टैटू
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जबकि छह से कम उम्र के बच्चे में संक्रमण होने पर 30 से 50 फीसदी मामले गंभीर हो जाते हैं। स्वस्थ वयस्कों में इसका संक्रमण होने पर पांच फीसदी को गंभीर संक्रमण हो सकता है। इससे प्रभावित होने वाले वयस्कों में 20 से 30 फीसदी को लीवर कैंसर होने की आशंका रहती है।
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जेपी अस्पताल के डॉ. अभिदीप चौधरी के मुताबिक, हेपेटाइटिस बी और हेपेटाइटिस सी लंबे समय से शराब पीने की आदत, वंशानुगत बीमारी (जिसमें शरीर के अंदर आयरन बहुत अधिक मात्रा में बन जाता है) मोटापा, संक्रमित सुई, असुरक्षित यौन संबंध, एक ही मशीनें से कई लोगों को टैटू बनाना, शराब का अत्यधिक सेवन करना, शारीरिक श्रम न करना, तली-भूनी चीजों का सेवन, दूषित पानी, वायरस की चपेट में आने आदि के कारण हो सकता है।
कई तरीकों से फैलता है वायरस
डॉ. अभिदीप बताते हैं कि हेपेटाइटिस बी और सी वायरस कई तरीकों से फैल सकता है। प्रारंभिक अवस्था में लक्षणों को पहचाना थोड़ा मुश्किल होता है। इसमें मरीज को पीलिया, अत्यधिक थकान, उल्टी, पेट में दर्द और सूजन, भूख कम लगना, वजन के घटने की शिकायत होती है। इसके बचने के लिए साफ-सफाई, सुरक्षित ब्लड ट्रांसफ्यूजन, टीकाकरण, साफ पानी पीएं व दूषित बर्फ का इस्तेमाल न करें।