दक्षिणी दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित श्मशान घाट में बुधवार को हरीश राणा का पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ अंतिम संस्कार किया गया। परिवार के सदस्यों के साथ महिलाओं के नेतृत्व वाले आध्यात्मिक आंदोलन ब्रह्म कुमारी के प्रतिनिधि भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए। इस दौरान माहौल बेहद भावुक था और हर किसी की आंखें नम नजर आईं। गाजियाबाद की राज एम्पायर सोसाइटी के निवासी भी अपना समर्थन देने के लिए वहां पहुंचे। इस समूह में विभिन्न एनजीओ, एम्स के कर्मचारी, रिश्तेदार और दोस्त भी शामिल थे।
2 of 13
दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित शवदाह गृह पर हरीश राणा का अंतिम संस्कार हुआ
- फोटो : अमर उजाला
अंतिम संस्कार से पहले शोक के साथ एक गहरी खामोश राहत भी महसूस की जा रही थी। 13 वर्षों तक कोमा में जीवन और मृत्यु के बीच झूलते रहे हरीश राणा को आखिरकार इच्छामृत्यु के बाद उस पीड़ा से मुक्ति मिल गई, जिसने उनके साथ पूरे परिवार को भीतर तक तोड़ दिया था।
3 of 13
दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित शवदाह गृह पर हरीश राणा का अंतिम संस्कार हुआ
- फोटो : अमर उजाला
पार्थिव शरीर जैसे ही एम्बुलेंस से उतारा गया, हर आंख नम थी। इन आंसुओं में बिछड़ने का दर्द तो था ही लेकिन एक लंबे कष्ट के अंत की थकी हुई राहत भी नजर आई। गुलाब की पंखुड़ियों से सजी चिता के सामने खड़े लोग मानो उस संघर्ष के गवाह थे, जो हरीश ने वर्षों तक बिना कुछ कहे सहा।
4 of 13
दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित शवदाह गृह पर हरीश राणा का अंतिम संस्कार हुआ
- फोटो : अमर उजाला
पार्थिव शरीर को जब चिता पर रखा गया, तो कांपते हाथों से केसरिया मालाएं अर्पित की गईं। उस पल हर चेहरा बीते 13 वर्षों की यादों से भरा था। सबसे भावुक क्षण तब आया, जब छोटे भाई आशीष राणा ने बहन भावना के साथ मिलकर मुखाग्नि दी। भाई-बहन की सिसकियां सिर्फ एक विदाई नहीं थीं, बल्कि उन वर्षों के दर्द का विसर्जन थीं, जो उन्होंने हर दिन जिया था।
5 of 13
दिल्ली के ग्रीन पार्क स्थित शवदाह गृह पर हरीश राणा का अंतिम संस्कार हुआ
- फोटो : अमर उजाला
हिंदू रीति-रिवाजों और ब्रह्माकुमारी संस्था की आध्यात्मिक परंपराओं के बीच शांति पाठ हुआ। मंत्रों की गूंज के बीच यह एहसास साफ था कि हरीश अब उस पीड़ा से मुक्त हैं, जिसने उनके जीवन को एक लंबी खामोश कैद बना दिया था।