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दिल्ली: सत्य निकेतन हादसे के बाद निगम कर रहा है पीजी सर्वे, गलत नीति के कारण गिनती अधूरी; तरीके पर उठे सवाल

Fri, 11 Sep 2026 06:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा संतोष कुमार, नई दिल्ली
संतोष कुमार, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 11 Sep 2026 06:24 AM IST
सार

निगम के पास दिल्ली में चलने वाले पीजी की कोई पुख्ता और अपडेटेड सूची नहीं है। वह आरडब्ल्यूए और स्थानीय स्तर से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर पीजी की पहचान कर सर्वे कर रहा है। जबकि छात्र बहुल इलाकों का हर घर पीजी में तब्दील हो रखा है।

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MCD conducting PG survey following Satya Niketan incident; questions raised over methodology
सत्य निकेतन हादसे के बाद... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सत्य निकेतन हादसे के बाद एमसीडी बेशक पेइंग गेस्ट (पीजी) का सर्वे कर रही है, लेकिन इसके तरीके पर सवाल उठने लगे हैं। निगम के पास दिल्ली में चलने वाले पीजी की कोई पुख्ता और अपडेटेड सूची नहीं है। वह आरडब्ल्यूए और स्थानीय स्तर से मिलने वाली सूचनाओं के आधार पर पीजी की पहचान कर सर्वे कर रहा है। जबकि छात्र बहुल इलाकों का हर घर पीजी में तब्दील हो रखा है।

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एमसीडी के सर्वे में दूसरी बड़ी खामी पीजी की एमसीडी की परिभाषा है। वह पूरी इमारत को ही पीजी के तौर पर देख रहा है। जबकि बड़ी संख्या में ऐसी इमारतें हैं, जहां केवल एक फ्लोर, कुछ कमरे या कुछ हिस्से छात्रों को किराये पर हैं। बाकी हिस्से में मकान मालिक या दूसरा परिवार रहते हैं। विशेषज्ञों का सवाल है कि इस तरह के सर्वे में एमसीडी पीजी इंडस्ट्री की तह तक नहीं पहुंच सकती। वह सर्वे की विश्वसनीयता और उसकी वास्तविक पहुंच पर भी सवाल उठा रहे हैं।
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तीन दिनों में सिर्फ 1,355 का सर्वे
एमसीडी ने तीन दिनों में सिर्फ 1,355 पीजी की पहचान कर उनका सर्वे किया है। इसमें एक हजार से ज्यादा का सर्वे पहले ही दिन कर दिया था। इसमें 27,000 छात्र रहते हैं। जबकि दिल्ली में करीब 4.50 लाख छात्रों को पीजी की जरूरत है। एमसीडी अधिकारी दबी जुबान से स्वीकार कर रहे हैं कि सर्वे का काम करीब पूरा हो गया है।  
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दिल्ली में ऐसे छात्र, जिनको पीजी की जरूरत

  • हर साल स्नातक में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या : करीब 80 हजार
  • इससे पहले के तीन साल में डीयू में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या: 2,40,000
  • चार वर्षीय स्नातक डिग्री बच्चों की कुल संख्या : 3,20,000
  • दूसरे राज्यों के पचास फीसदी छात्रों की संख्या : 1,60,000
  • डीयू स्नातकोत्तर, एसओएल, जामिया, जेएनयू समेत दूसरे विश्वविद्यालयों में बाहरी राज्यों से आने वाले छात्रों की संख्या : 60,000
  • प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले प्रतिभागियों की संख्या : करीब 2,00,000
  • पढ़ाई और तैयारी करने वाले छात्रों+प्रतिभागियों की कुल संख्या: करीब 4,50,000

(नोट: यह आंकड़े अलग-अलग विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों और कोचिंग संस्थानों में पढ़ाने वाले एक्सपर्ट की राय से निकाले गए हैं।)

पीजी की संख्या बहुत ज्यादा, सर्वे में कम
छात्र ही नहीं, कामकाजी महिलाओं व पुरुषों के लिए दिल्ली में पीजी चल रहे हैं। इनकी संख्या बड़ी है। इसके लिए बिल्डिंग प्लान व फायर एनओसी के साथ एमसीडी से भी पीजी चलाने की अनुमति लेनी होती है। एमसीडी अगर अपने स्तर पर होमवर्क करने के साथ दिल्ली पुलिस और फायर डिपार्टमेंट से डाटा ले ले तो पीजी की संख्या काफी हद तक पता चल सकती है। 
-शमशेर सिंह, सेवानिवृत्त चीफ टाउन प्लानर, एमसीडी

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