केंद्रीय आवास व शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से साफ-साफ शब्दों में कहा है कि मेट्रो किराये का राजनीतिकरण न करें। इससे किसी का हित नहीं सधेगा। पुरी ने सोमवार शाम केजरीवाल के पत्र का जवाब दिया है। इसमें उन्होंने सिलसिलेवार ढंग से बताया है कि केजरीवाल की सारी मांगें कानून के खिलाफ हैं। डीएमआरसी का संचालन नियमों के तहत ही किया जाएगा।
दरअसल, रविवार शाम मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखा था। इसमें कहा था कि डीएमआरसी में 50 फीसदी की हिस्सेदार डीएमआरसी के ऑपरेशनल घाटे की भरपाई के लिए 1500 करोड़ रुपये देने को तैयार हैं। वहीं, मेट्रो को दिल्ली को पूरी तरह सौंपने की बात भी उन्होंने कही थी। इसके अलावा केजरीवाल ने डीएमआरसी बोर्ड किराया बढ़ोतरी को कुछ वक्त के लिए स्थगित कर दे।
पुरी ने ने हैरानी जताई है कि डीएमआरसी एक्ट के कुछ चुने हुए प्रावधानों को ही केजरीवाल बार-बार सामने ला रहे हैं। जबकि एक्ट का सेक्शन-37 साफ करता है कि किराया निर्धारण समिति के फैसले में केंद्र सरकार व डीएमआरसी बोर्ड भी दखल नहीं दे सकती।
हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, मेट्रो प्रोजेक्ट 50-50 फीसदी की हिस्सेदारी का केंद्र व राज्य का संयुक्त वेंचर है। लेकिन ऑपरेशनल घाटे की भरपाई का जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। कानूनन इस मामले में केंद्र कुछ भी नहीं कर सकता। दूसरी तरफ केजरीवाल की दिल्ली मेट्रो को अपने अधिकार में देने की मांग की तारीफ करते हुए पुरी ने कहा कि काननून दिल्ली मेट्रो को राज्य या केंद्र के अधीन सौंपने का विचार भी नहीं हो सकता। कंपनी का संचालन स्पेशल पर्पस व्हीकल के जरिये ही होता है।
दिल्ली मेट्रो दुनिया में सबसे बेहतर
पुरी का कहना है कि केजरीवाल की इस राय से वह इत्तेफाक नहीं रखते हैं कि दिल्ली मेट्रो पूरी क्षमता से काम नहीं कर रही है। पुरी के मुताबिक, डीएमआरसी दुनिया की किसी भी मेट्रो को टक्कर दे सकती है। यह दिल्ली का बेहतरीन ब्रांड है। इसके उलट अगर दिल्ली सरकार अगर अपनी क्षमता साबित करना चाहती है तो नई मेट्रो पॉलिसी के तहत वह फेज-चार पर फोकस करे। जिसके तैयार होने से दिल्ली के 40 लाख लोगों को फायदा मिलेगा।