बांस की खप्पचियों में तार बांध-बांध कर सैकड़ों आदमकद ढांचे तैयार कर किए जा रहे हैं। कपड़े, गत्ते और कागज से इनको एक राजा के स्वरूप में बदला जा रहा है। जिसे रंगों से सूरत दी जाएगी। सूरत लंकेश, रावण, दशानन की..। चार से 60 फुट तक के ये रावण एमजी रोड में दिन रात बन रहे हैं। इन्हें बनाने वाले कारीगरों में गोविंद भी शामिल है। उसे उम्मीद है कि कोरोना संक्रमण के दो साल बाद इस बार उसके बनाए रावण बिकें तो दिवाली बाद वह शादी की तैयारी शुरू करे।
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रावण के पुतले में रंग भरता कारीगर
- फोटो : अमर उजाला
सुखराली, महाराणा प्रताप चौक, आईटीआई गेट, सेक्टर 12, सेक्टर 14 में फुटपाथ से लेकर पार्क तक जहां तहां रावण के ये पुतले दिख जाएंगे। कारीगरों को उम्मीद है कि इस बार दशहरा अच्छा होगा और उनके काम बन जाएंगे। चार से पंद्रह फुट तक के ये रावण दो से दस हजार रुपये तक में मिलते हैं। सर्वाधिक मांग छह से दस हजार तक के रावणों की होती है। ग्राहक की मांग पर कारीगर छोटी छोटी आतिशबाजी भी लगा देते हैं।
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कारीगर गोविंद
- फोटो : अमर उजाला
बरेली के गोविंद की शादी दिवाली के बाद तय हुई है। वो भी दिन रात रावण को रूप दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि बीते वर्ष 70-80 रावण बनाए थे, लेकिन मांग कम होने की वजह से रेट कम हो गया। जिससे 50 हजार रुपये का नुकसान हुआ। इससे पहले वर्ष 2018 के दशहरा में 160 रावण बेचे थे। उस समय डेढ़ लाख की कमाई हुई थी। इस बार तो खुद की शादी के लिए ही 70 हजार रुपये चाहिए। इसलिए अभी से मेहनत कर रहे हैं।
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रावण के पुतले में रंग भरते कारीगर
- फोटो : अमर उजाला
गोविंद ने बताया कि अबकी बार यूपी के बरेली, बदांयू, सहसवान, उझियानी से लगभग 60 कारीगर अपने साथियों के साथ यहां आए हैं। 10 वर्ष पहले तक केवल दो तीन लोग ही आते थे, तब कंप्टीशन कम था, अब बहुत बढ़ गया है। पिता सोरन सिंह के साथ उसने गुरुग्राम में ये काम सीखा था।
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रावण के पुतला बनाते कारीगर
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बदायूं निवासी दया ने बताया कि चार से 60 फुट के रावण दो से बीस हजार रुपये तक में मिलते हैं। वह ग्राहक की मांग पर मनपसंद रूप के रावण बना देते हैं। कुछ लोग पहले से ही मनपसंद रंग के रावण का ऑर्डर दे देते हैं। कुछ सोसाइटियों से लगातार ऑर्डर मिलते रहते हैं। इस बार घर के कई काम इसी कमाई से पूरे होने की उम्मीद है। आगे हरि की इच्छा। गोविंद और दया की तरह ही हर कारीगर को दशहरे से बड़ी उम्मीद है। रावण खूब बिके तो काम बने..।