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बुलंदशहर हादसा: पीएसी जवान के पिता बोले-अब कौन कहेगा...पापा! ठंड बहुत हो रही है, अपना ख्याल रखा करो
Wed, 03 Feb 2021 04:32 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, बुलंदशहर
अमर उजाला नेटवर्क, बुलंदशहर
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 03 Feb 2021 04:32 PM IST
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बुलंदशहर
- फोटो : अमर उजाला
बुलंदशहर में हादसे का शिकार हुए आरक्षी प्रवीण का पार्थिव शरीर घर पहुंचते ही कोहराम मच गया। इस दौरान प्रवीण के पिता ने कहा कि प्रवीण जब भी फोन करता, हम बूढ़े मां-बाप की सलामती पूछता था। दो दिन पहले उससे आखिरी बार बात हुई। तब भी उसने हमारी खैरियत ही पूछी। कहा, पापा! ठंड बहुत हो रही है, अपना ख्याल रखा करो।
परिजनों से बात करते हुए पुलिस अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
बेवजह घर से बाहर निकलने की जरूरत नहीं है। यह बात कहते ही मसूरी के इंद्रगढ़ी अंबेडकर नगर कॉलोनी निवासी रणजीत सिंह दहाड़े मारकर रोने लगे। बुलंदशहर हादसे में शहीद हुए पीएसी के सिपाही प्रवीण का शव मंगलवार दोपहर घर पहुंचा तो रुदन फैल गया। मौकेपर मौजूद लोगों की आंखें भी छलक उठीं।
जवानों को श्रद्धांजलि
- फोटो : अमर उजाला
परिजनों के मुताबिक रणजीत सिंह के चार बेटे और एक बेटी थी। पांच भाई-बहनों में चौथे नंबर के प्रवीण कुमार 2018 में पीएसी में भर्ती हुए थे। वह 38वीं वाहिनी पीएसी की एफ-कंपनी में तैनात थे और वर्तमान में किसान आंदोलन के मद्देनजर सिकंदराबाद, बुलंदशहर में हाईवे स्थित चार नंबर कट पर उनकी ड्यूटी थी।
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प्रवीन का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
मंगलवार तड़के बेकाबू डीसीएम पीएसी के टेंट में जा घुसा, जिसमें गाजियाबाद के गांव इंद्रगढ़ी निवासी प्रवीण कुमार व थाना भोजपुर के गांव मुरादाबाद निवासी प्रवीण कर्दम शहीद हो गए। दोपहर करीब एक बजे प्रवीण कुमार का शव इंद्रगढ़ी स्थित घर पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए लोगों का सैलाब उमड़ गया। परिवार के लोग गश खाकर गिरने लगे। घर की महिलाओं को लोगों ने बमुश्किल संभाला।
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जानकारी करते हुए पुलिस अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
हमें क्या पता था कि अबकी बार शव आएगा
सिपाही प्रवीण कुमार के पिता ने बताया कि करीब एक सप्ताह पहले प्रवीण कुछ देर के लिए घर आया और कुछ देर में ही चला गया। शायद, आखिरी बार शक्ल दिखाने आया था। उन्हें क्या पता था कि अगली बार प्रवीण नहीं, बल्कि उसका शव घर आएगा। मसूरी एसएचओ राघवेंद्र सिंह ने बताया कि परिजनों की मौजूदगी में राजकीय सम्मान के साथ सिपाही प्रवीण का अंतिम संस्कार करा दिया गया। मुखाग्नि पिता रणजीत सिंह ने दी।
सिपाही प्रवीण कुमार के पिता ने बताया कि करीब एक सप्ताह पहले प्रवीण कुछ देर के लिए घर आया और कुछ देर में ही चला गया। शायद, आखिरी बार शक्ल दिखाने आया था। उन्हें क्या पता था कि अगली बार प्रवीण नहीं, बल्कि उसका शव घर आएगा। मसूरी एसएचओ राघवेंद्र सिंह ने बताया कि परिजनों की मौजूदगी में राजकीय सम्मान के साथ सिपाही प्रवीण का अंतिम संस्कार करा दिया गया। मुखाग्नि पिता रणजीत सिंह ने दी।