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श्मशान घाट हादसाः दो विभाग के तीन इंजीनियरों ने निर्माण को दे दी थी क्लीन चिट, अब वही हॉल-बरामदा सील

Sat, 09 Jan 2021 11:07 AM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, मुरादनगर
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादनगर Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Sat, 09 Jan 2021 11:07 AM IST
सार

- अगस्त 2020 में पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन की अध्यक्षता में बनी थी जांच कमेटी 
- जिस निर्माण को दी थी जांच में क्लीन चिट, अब जांच कमेटी ने उसी को माना असुरक्षित
- हादसे के अगले दिन ही सील कर दिया था श्मशान परिसर में बना बरामदा और हॉल
- चार महीने पहले हुई जांच पर भी उठ रहे सवाल

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muradnagar crematorium roof collapse case two department three engineers gave clean chit to
muradnagar accident - फोटो : अमर उजाला

गाजियाबाद के मुरादनगर श्मशान घाट में गलियारा जमींदोज होने से हुईं 24 मौत के बाद भले ही जिले के अधिकारी और जनप्रतिनिधि अफसोस जता रहे हों, लेकिन इस हादसे से पहले किसी को भी यहां भ्रष्टाचार नजर नहीं आया। लोग घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किए जाने की शिकायतें कर रहे थे, लेकिन अधिकारी आंखें मूंदकर क्लीन चिट दे रहे थे। श्मशान घाट के सौंदर्यीकरण के 55 लाख के निर्माण कार्यों की जांच अगस्त 2020 में पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता मनीष वर्मा की अध्यक्षता में बनी कमेटी कर चुकी थी।

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मुरादनगर श्मशान घाट में सील भवन - फोटो : अमर उजाला

इस जांच टीम में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के एक अवर अभियंता और एक सहायक अभियंता भी थे। इन तीनों इंजीनियरों की टीम ने तब तक हुए सभी निर्माण कार्यों को गुणवत्ता के मानकों पर पास कर दिया था, जबकि इन्हीं निर्माण को अब असुरक्षित मानते हुए सील करा दिया गया है। इस तकनीकी टीम ने मुरादनगर नगर पालिका की ओर से बंबा रोड स्थित श्मशान घाट के सौंदर्यीकरण के कार्य समेत कई अन्य कार्यों की भी जांच की थी।

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मुरादनगर श्मशान घाट का मुआयना करते अधिकारी - फोटो : अमर उजाला

मुरादनगर के वार्ड-4 स्थित इस श्मशान घाट की तकनीकी टीम की ओर से की गई जांच की रिपोर्ट ‘अमर उजाला’ के पास है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्य के लिए 55.98 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई थी। अगस्त में हुई इस जांच के समय तक ठेकेदार 41.87 लाख रुपये सौंदर्यीकरण के काम पर खर्च कर चुका था। यानी करीब 76 फीसदी काम पूरा हो चुका था। इस रकम से श्मशान घाट में बरामदा, हॉल और अंत्येष्टि स्थल का निर्माण कराया गया था। गलियारे का निर्माण भी शुरू कराया जा चुका था। इस जांच टीम ने तब तक बन चुके सभी निर्माण कार्य को क्लीन चिट दे दी थी।

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Cremation Ground Accident News - फोटो : अमर उजाला

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस निर्माण कार्य में इस्तेमाल की ईंटों की कंप्रेसिव स्ट्रैंथ (दबाव झेलने की ताकत) की जांच गाजियाबाद स्थित राजकीय पॉलीटेक्निक से कराई गई थी। यह जांच संतोषजनक पाई गई थी। हालांकि टीम ने वर्क मैनशिप प्रभावित होने के कारण ठेकेदार के बिल से 10 हजार रुपये की कटौती की थी। टीम ने रिपोर्ट में कहा था कि कार्य प्रगति पर है और किए गए कार्य की गुणवत्ता प्रथम दृष्ट्या संतोषजनक है।

इसके बाद गलियारे की छत शटरिंग खुलने के 15 दिन बाद ही भरभरा कर गिर गई और श्मशान घाट परिसर में बने हॉल और बरामदे के निर्माण कार्य की गुणवत्ता भी खराब पाई गई। इसी वजह से अब हादसे के बाद गठित जांच टीम ने इन सभी निर्माण को असुरक्षित की श्रेणी में रखकर सील करा दिया है। टीम ने माना कि इस निर्माण में भी मानकों को ठेंगा दिखाकर भ्रष्टाचार किया गया और मानकों के अनुरूप निर्माण नहीं किया गया। यह निर्माण भी गलियारे की तरह कभी भी ढह सकता है और फिर बेगुनाहों की जान जा सकती है। 

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सड़क पर रखे शव - फोटो : अमर उजाला

जांच रिपोर्ट पर इन अधिकारियों के हस्ताक्षर 
बंबा रोड श्मशान घाट में हुए निर्माण कार्यों की जांच रिपोर्ट पर पीडब्ल्यूडी की निर्माण खंड-2 के अधिशासी अभियंता मनीष वर्मा के बतौर कमेटी के अध्यक्ष हस्ताक्षर हैं। इनके अलावा ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अवर अभियंता डीके तंवर और इसी विभाग के सहायक अभियंता वाईएन चौधरी के बतौर सदस्य हस्ताक्षर हैं। अब श्मशान घाट में हुए हादसे के बाद सील किए गए बरामदे व हॉल को क्लीन चिट देने को लेकर इनकी भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। 

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