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मुरादनगर हादसा: मौत के मुंह से लौटे लोगों ने सुनाई आपबीती, बोले- हल्की सी चूक होती तो हम भी...
Tue, 05 Jan 2021 11:42 AM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला ब्यूरो, गाजियाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, गाजियाबाद
Published by: प्राची प्रियम
Updated Tue, 05 Jan 2021 11:42 AM IST
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मुरादनगर हादसा
- फोटो : अमर उजाला
मुरादनगर के बंबा रोड श्मशान घाट पर गलियारे की छत गिरने के बाद नीचे दबे कई लोगों की सांसें अटकी रहीं। किसी का पूरा शरीर मलबे में दबा था तो किसी के पैर और हाथ। जेसीबी ने मलबे के बड़े टुकड़े हटाने शुरू किए तो नीचे दबे कई लोगों की आंखों में मौत का भयावह मंजर तैर गया। दहशत से दिल कांप उठा। लगा अगर जरा भी चूक हो गई तो भारी पत्थर पूरे जिस्म को कुलचकर रख देगा। मलबे के नीचे से निकले कई घायल यह आपबीती बताते हुए सिहर उठते हैं। हादसे में घायल हुए कई लोग आपबीती बताते हुए कहते हैं जाको राखे सांइया, मार सके न कोय। मौत से एक नहीं दो-दो बार सामना हुआ पर जिंदगी बाकी थी सो बच गए।
रोते बिलखते परिजन
- फोटो : कुमार संजय
मेरे सिर पर झूल रहा था मलबे का बड़ा टुकड़ा
जयराम के दामाद कृष्णपाल सिंह ने बताया कि जयराम मेरे ससुर थे। उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए मैं, बेटा अश्वनी, मुजफ्फरनगर से दामाद निशांत भी पहुंच थे। भाई जयवीर सिंह भी थे। छत गिरी तो मैं समझ नहीं पाया कि क्या हुआ। आधा जिस्म मलबे के बड़े टुकड़ों के बीच फंस गया। मलबे में दबे हाथ-पैर और पसली में भयंकर दर्द हो रहा था। गनीमत रही कि सिर मलबे के बाहर था। रास्ता मलबे से बंद हो गया था इसलिए दीवार तोड़कर एक जेसीबी अंदर घुसी तो उम्मीद जगी कि शायद अब बच जाऊंगा।
जयराम के दामाद कृष्णपाल सिंह ने बताया कि जयराम मेरे ससुर थे। उनके अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए मैं, बेटा अश्वनी, मुजफ्फरनगर से दामाद निशांत भी पहुंच थे। भाई जयवीर सिंह भी थे। छत गिरी तो मैं समझ नहीं पाया कि क्या हुआ। आधा जिस्म मलबे के बड़े टुकड़ों के बीच फंस गया। मलबे में दबे हाथ-पैर और पसली में भयंकर दर्द हो रहा था। गनीमत रही कि सिर मलबे के बाहर था। रास्ता मलबे से बंद हो गया था इसलिए दीवार तोड़कर एक जेसीबी अंदर घुसी तो उम्मीद जगी कि शायद अब बच जाऊंगा।
रोते बिलखते परिजन
- फोटो : कुमार संजय
जेसीबी ने कास शुरू किया तो मलबा भरभराकर गिरने लगा। यह सोचकर ही दिल कांप उठा कि कहीं जेसीबी कोई टुकड़ा उठाए और दोबारा मेरे ऊपर न गिर जाए। लगा कि एक बार तो बच गया, अब दूसरी बार मौत से सामना हो रहा है। दो घंटे बाद मलबे से बाहर निकाला गया तो दोनों पैर झूल गए थे। भाई जयवीर की मलबे में दबकर मौत हो गई। बेटा अश्वनी अस्पताल में भर्ती है। दामाद के पैर का मुजफ्फरनगर में ऑपरेशन हुआ है। एंबुलेंस अस्पताल लेकर आई तो यहां पर दायें पैर में कच्चा प्लास्टर चढ़ा दिया और बाएं पैर में पट्टी की है।
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संगम विहार में पसरा मातम
- फोटो : कुमार संजय
किस्मत ने बचाया, किनारे पहुंचते ही गिर गई छत
निर्मल कुमार बताते हैं कि मैं संगम विहार में जयराम के घर के सामने ही रहता हूं। वह किराए पर रहते थे, मेरा अपना मकान है। श्मशान घाट में एक जगह एकत्र होकर मौन धारण किया था। जब सब खड़े हो रहे थे तो मैं बीच में था, लेकिन मेरी किस्मत थी या अभी जिंदगी और बाकी थी। मैं बीच से निकलकर किनारे चला गया तभी छत गिर गई। करीब एक घंटे तक छत के नीचे दबा रहा। पास में ही कई पुलिस चौकी और थाना भी है, लेकिन काफी देर तक पुलिस नहीं आई। जब आई भी तो बाहर निकालना तो दूर प्रयास भी नहीं किया गया।
निर्मल कुमार बताते हैं कि मैं संगम विहार में जयराम के घर के सामने ही रहता हूं। वह किराए पर रहते थे, मेरा अपना मकान है। श्मशान घाट में एक जगह एकत्र होकर मौन धारण किया था। जब सब खड़े हो रहे थे तो मैं बीच में था, लेकिन मेरी किस्मत थी या अभी जिंदगी और बाकी थी। मैं बीच से निकलकर किनारे चला गया तभी छत गिर गई। करीब एक घंटे तक छत के नीचे दबा रहा। पास में ही कई पुलिस चौकी और थाना भी है, लेकिन काफी देर तक पुलिस नहीं आई। जब आई भी तो बाहर निकालना तो दूर प्रयास भी नहीं किया गया।
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घायल निर्मल
- फोटो : कुमार संजय
किसी तरह से लोगों ने मलबा तोड़कर बाहर निकाला। जब बाहर निकला तो पुलिस वाले पूछ रहे थे कैसे जाओगे अस्पताल तो मैंने कहा कि जिप्सी से पहुंचाओ मैं अकेले नहीं जा सकता। इसी दौरान एंबुलेंस आ गई और आईटीएस अस्पताल ले गई, लेकिन वहां से जिला अस्पताल रेफर किया गया। पूरे शरीर में चोट है। दायां पैर टूट गया। बाएं पैर में भी रॉड बांधी गई है। पूरे शरीर में दर्द है। नाक व सिर में भी टांके आए हैं।