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श्मशान घाट हादसा: पलक झपकते ही बदल गया था मंजर, मलबे के नीचे से आ रहीं थीं बचाओ-बचाओ की आवाजें
Wed, 06 Jan 2021 08:16 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 06 Jan 2021 08:16 AM IST
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Cremation Ground Accident News
- फोटो : अमर उजाला
गाजियाबाद के मुरादनगर में श्मशान घाट में पलक झपकते ही मंजर बदल गया था। लोग जयराम के अंतिम संस्कार के बाद उनकी आत्मा की शांति केलिए प्रार्थना कर रहे थे। इसी बीच छत गिरने से कई जिंदगी हमेशा के लिए खामोश हो गई। वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि गलियारे की छत गिरते ही भगदड़ मच गई थी तो वहीं मलबे केनीचे से बचाओ-बचाओ की आवाजें आने लगी थीं।
गाजियाबाद हादसा
- फोटो : अमर उजाला
कोई पत्थर केनीचे छटपटा रहा था तो कोई पिता को आवाज लगा रहा था। जो बाल-बाल बच गए थे वह चिल्ला रहे थे-मेरे दादा दबे हुए हैं, उन्हें निकाल लो, नहीं तो वह मर जाएंगे। रविवार को मुरादनगर के बंबा श्मशान घाट में हुए हादसे के दौरान वहां मौजूद रहे योगेंद्र सिंह ने बताया कि वह भयावह मंजर कभी नहीं भूलने वाला है। लोग जिंदगी की भीख मांग रहे थे।
गाजियाबाद हादसा
- फोटो : अमर उजाला
कई लोग आधे लिंटर के नीचे दबे हुए थे और छटपटा रहे थे। वह बार-बार एक ही आवाज दे रहे थे भैया मुझे बचा लो, मैं मर जाऊंगा। मुझे जल्दी से निकाल लो। उनमें से तीन लोगों को जिंदा निकाला। योगेंद्र ने कहा कि जो जिस पोजिशन में था, उसी में रह गया। कितना दर्दनाक मंजर था ये बताने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। भगवान किसी को जीवन में ऐसी घटना न दिखाए।
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मुरादनगर हादसा
- फोटो : अमर उजाला
एक और प्रत्यक्षदर्शी रवि ने बताया कि घटना केबाद मौके पर पहुंचने वाले वह दूसरे व्यक्ति थे। उन्होंने बताया कि लिंटर केनीचे 45 से 50 लोग दबे हुए थे। उसमें से केवल 7-8 लोगों की ही बचाने केलिए आवाज आ रही थी। मलबे में दबे लोगों में किसी की गर्दन शरीर केअंदर घुस गई थी तो किसी का आधा शरीर ही दिखाई दे रहा था। लोगों की तड़प को देखा नहीं जा रहा था।
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मलबे के नीचे दबे लोग
- फोटो : अमर उजाला
जितने को निकाल सकते थे, निकाला। एक व्यक्ति के सिर के अंदर चार सरिया घुसकर दूसरी साइड में पार निकली हुई थीं। ऐसा मंजर कभी नहीं देखा। रात को नींद भी नहीं आ रही है। बस, वही सीन घूमता रहता है। प्रत्यक्षदर्शी गुलशन राजपूत ने बताया कि वह भी कुछ ही मिनट में अपने साथियों के साथ घटना स्थल पर पहुंच गए थे। कुछ लोग लिंटर के ऊपर चढ़े हुए थे और दबे लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे थे।