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पापा भीड़ में दम घुट रहा है, वापस चलो’: भीड़ को देखकर न लौटते तो भगदड़ में जा सकती थी जान, बोले-खुशकिस्मत रहे
Sun, 02 Jan 2022 09:59 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 02 Jan 2022 09:59 AM IST
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संजीव मलिक और उनके भाई का परिवार
- फोटो : अमर उजाला
साल के पहले ही दिन वैष्णो देवी धाम पर मची भगदड़ में कई लोगों की जान चली गई, लेकिन गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन निवासी संजीव मलिक और उनके भाई का परिवार खुशकिस्मत रहा। केएम रेजिडेंसी के रहने वाले संजीव और उनके परिवार के छह अन्य सदस्य भगदड़ मचने से चंद मिनट पहले ही दर्शन करने की बजाय वापस लौट आए थे। भीड़ में उनकी बेटी परेशान हो गई तो परिवार ने बाद में दर्शन करने का फैसला किया। संजीव मलिक (53) ने बताया कि वह पत्नी रुचिका, भाई अनुज, उनकी पत्नी वंदना और दोनों परिवारों के बच्चों तान्या, राहुल, शिखर के साथ वैष्णो देवी के दर्शन करने गए थे। रविवार तड़के करीब 3 बजे वह भी दर्शन के लिए लगी लाइन में लगे थे। भीड़ इतनी बढ़ गई कि धक्कामुक्की शुरू हो गई। इसी दौरान उनके भाई की पत्नी और उनकी बेटी ने भीड़ में न जाने की बात कही।
vaishno devi incident
- फोटो : अमर उजाला
संजीव ने बताया कि उन्होंने परिवार को कहा कि सभी लाइन में लगे हैं तो हम भी धीरे-धीरे लाइन में ही लगकर मंदिर तक पहुंच जाएंगे। वह फिर आगे बढ़ने लगे। इसी दौरान उनकी बेटी ने कहा कि ‘पापा भीड़ में दम घुट रहा है, वापस चलो’।
vaishno devi incident
- फोटो : अमर उजाला
परिवार के सदस्यों ने भी भीषण भीड़ में दर्शन न करने का फैसला किया और वह भीड़ से थोड़ा पीछे लौट आए। करीब 15-20 मिनट बाद ही भीड़ में भगदड़ मच गई और कई लोगों की जान चली जाने की सूचना मिली।
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vaishno devi incident
- फोटो : अमर उजाला
संजीव का कहना है कि परिवार के लोगों ने शुक्र मनाया कि शायद मां वैष्णो ने ही उन्हें बेटी और भाई की पत्नी के माध्यम से यह प्रेरणा दी कि वह भीड़ से निकल जाएं।
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Mata Vaishno Devi Bhawan
- फोटो : अमर उजाला
हर तरफ मची थी चीख-पुकार
संजीव मलिक का कहना है कि भगदड़ मचते ही हर तरफ चीख-पुकार मच गई। वह इतनी दूरी पर थे कि भगदड़ से तो बच गए, लेकिन चिल्लाने की आवाज और अफरातफरी का मंजर उन्हें दिखाई दे रहा था। वह तत्काल वहां से निकलकर नीचे सुरक्षित ठिकाने पर आ गए। रविवार को भी वह जम्मू में ही रहे।
संजीव मलिक का कहना है कि भगदड़ मचते ही हर तरफ चीख-पुकार मच गई। वह इतनी दूरी पर थे कि भगदड़ से तो बच गए, लेकिन चिल्लाने की आवाज और अफरातफरी का मंजर उन्हें दिखाई दे रहा था। वह तत्काल वहां से निकलकर नीचे सुरक्षित ठिकाने पर आ गए। रविवार को भी वह जम्मू में ही रहे।