गाजियाबाद में तीन बहनों की आत्महत्या मामले में कब्जे में लिए गए दो मोबाइल फोन व सुसाइड नोट की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने में तीन से चार सप्ताह लग सकते हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लैब से इनकी रिपोर्ट प्राथमिकता के आधार पर मांगी गई है, जिससे जांच जल्द पूरी हो सके।
रिपोर्ट तैयार होने तक फॉरेंसिक विशेषज्ञों की जानकारी में जो तथ्य आएंगे, उन्हें जांच में शामिल किया जाएगा। किशोरियों ने जिस कमरे से छलांग लगाई थी, पुलिस को वहां एक मोबाइल फोन भी मिला था। वह उनकी मां का था।
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भारत सिटी सोसायटी में तीन किशोरियों की सामूहिक आत्महत्या के बाद जांच के लिए आई पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसे लेकर वह पूजा कक्ष में पहुंची थीं और कुछ देर बाद दरवाजा बंद करके खिड़की से छलांग लगा दी थी। मोबाइल पुलिस ने कब्जे में ले लिया था, लेकिन सर्विलांस टीम को उसमें ऐसा कुछ भी नहीं मिला जो गुत्थी को सुलझा सके।
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भारत सिटी सोसायटी में तीन किशोरियों की सामूहिक आत्महत्या
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
शनिवार रात पुलिस ने हादसे से करीब 15 दिन पहले बच्चियों से छीना गया एक मोबाइल भी बरामद किया। सोमवार को दोनों मोबाइल जांच के लिए निवाड़ी स्थित फॉरेंसिक लैब भेजे गए। वहीं, घटनास्थल पर मिला सुसाइड नोट भी लैब भेजा गया है।
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फ्लैट में फैली तस्वीरें
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सामान्य तौर पर लिखावट की जांच रिपोर्ट आने में दो माह लगते हैं। बड़े व गंभीर मामलों में रिपोर्ट एक माह में भी मिल जाती है। मोबाइल की रिपोर्ट तीन से चार हफ्ते में आ जाती है।
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भारत सिटी सोसायटी में तीन किशोरियों की सामूहिक आत्महत्या के बाद जांच करती पुलिस टीम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
संदेह हुआ तो परिवार के सदस्यों की लिखावट से होगा मिलान
अब तक की पुलिस जांच में सामने आया है कि सुसाइड नोट प्राची ने लिखा। इसे देखते हुए पुलिस ने प्राची और निशिका की कॉपी व रजिस्टर लैब भेजे हैं। अगर सुसाइड नोट की लिखावट का मिलान तीन में से किसी भी किशोरी की लिखावट से नहीं हुआ तो चेतन और उनकी पत्नियों सुनीता, हिना व टीना की लिखावट का मिलान फॉरेंसिक विशेषज्ञ करेंगे।