ग्रेटर नोएडा के व्यापारी गौरव चंदेल की हत्या के बाद सबूतों के साथ लापरवाही करने का बड़ा मामला सामने आया है। खबर है कि फॉरेंसिक टीम मौका-ए-वारदात पर एक दिन बाद पहुंची जिसके कारण की सबूत मिट गए। हैरान करने वाली बात यह है कि पुलिस ने घटनास्थल पर बैरिकेड भी नहीं लगाया गया था, जिसके कारण सबूतों का बचना और भी मुश्किल हो गया।
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मृतक गौरव चंदेल(दाएं) और उनका फ्लैट(बाएं)
- फोटो : अमर उजाला
पर्थला गोलचक्कर से एक किलोमीटर आगे और गौड़ गोलचक्कर से तीन सौ मीटर पहले सर्विस रोड के किनारे मंगलवार सुबह परिजनों को गौरव चंदेल मिले थे। परिजन उन्हें यथार्थ अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टर ने गौरव को मृत घोषित कर दिया था। परिजनों ने ही अस्पताल से इसकी सूचना पुलिस को दी। मौत का कारण पता लगाने के लिए पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया था।
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जांच करने पहुंची फॉरेंसिक टीम
- फोटो : अमर उजाला
लेकिन पुलिस ने मौका-ए-वारदात को लेकर बड़ी लापरवाही दिखाई, जहां से आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत मिल सकते थे। पुलिस ने मौके पर बेरिकेडिंग तक नहीं की। ऐसे में खून देखकर इलाके के कुत्ते जमा हो गए और उन धब्बों को चाट-चाटकर साफ कर दिया। फॉरेंसिक टीम भी एक दिन बाद वहां पहुंची। हालांकि, पुलिस का कहना है कि परिजनों से सूचना मिलने के बाद मौके से ब्लड और मिट्टी के सैंपल जांच के लिए उठा लिए गए थे। जबकि शव मिलने के एक दिन बाद फॉरेंसिक टीम वारदात की जगह पहुंची थी। ऐसे में सबूत मिटने की संभावना है।
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घटनास्थल पर जांच करती टीम
- फोटो : अमर उजाला
आसपास के लोगों ने बताया कि हो सकता है कि वारदात के समय गौरव की बदमाशों से हाथापाई हुई हो, आरोपियों को भी चोट लगी हो। मौके पर उनका खून और सामान भी गिरा हो सकता है। फॉरेंसिक टीम समय अगर मौका ए वारदात पर पहुंच जाती तो सबूत मिल सकते थे। बेरिकेड नहीं लगाने की वजह से कुत्ते खून चाट रहे थे। हम लोग उन्हें कब तक रोकते। ऐसे में सबूतों पर प्रभाव पड़ सकता है।
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गौरव चंदेल का परिवार
- फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा जो बचे-खुचे सबूत बचे थे, उन्हें साफ करने में बारिश ने भी अहम भूमिका निभाई। जिस दिन घटना हुई, उस दिन इलाके में बारिश हो रही थी। इसके बावजूद लापरवाही दिखाई गई और एक दिन बाद फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। ऐसे में बारिश की वजह से भी की सबूतों के मिटने की बात कही जा रही है।