गौरव चंदेल हत्याकांड में शुरू से ही पुलिस की लापरवाही दिखी। पहले नोएडा पुलिस ने अपनी लेटलतीफी दिखाई तो अब गौरव चंदेल की कार मिलने के मामले में गाजियाबाद पुलिस ने लापरवाही की हदें पार कर दीं। हत्याकांड के बाद मैनेजर की जो सेल्टोस कार पूरे एनसीआर में चर्चा का विषय बनी हुई है, उसे गाजियाबाद पुलिस ने नजरअंदाज कर दिया। कार की सूचना मिलने के 10 घंटे बाद पुलिस एक्टिव मोड में आई। आगे जानिए पूरा मामला...
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gaurav chandel murder case
- फोटो : अमर उजाला
जिस जगह घटना हुई, वह स्थान गाजियाबाद की सीमा से चंद किलोमीटर दूर है। हत्या के नौ दिन बाद बदमाश कार लेकर गाजियाबाद पहुंच गए और मसूरी थानाक्षेत्र के आकाश नगर में कार खड़ी कर भाग गए, लेकिन पुलिस सोती रही। नोएडा पुलिस के मुताबिक कार को किसी टोल प्लाजा से नहीं गुजारा गया। संभवत: तिगरी गोल चक्कर से कार लायी गई।
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ऐसे में घटनास्थल से शुरू होकर बदमाशों ने पहले नोएडा फेज-थ्री और बिसरख थाने की सीमा पार की। इसके बाद गाजियाबाद में विजयनगर, कविनगर थानाक्षेत्र से होते हुए मसूरी क्षेत्र में जा घुसे। मगर अफसोस, मुस्तैदी से रात्रि गश्त करने वाली पुलिस को न बदमाश दिखे और न सेल्टोस कार। यह हाल तब हैं जब रात में एबीएस कट और डासना पुल के नीचे पुलिस की सघन चेकिंग होती है।
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आखिर कहां थी पुलिस
कार की अगली नंबर प्लेट टूटी हुई मिली, जबकि पिछली नंबर प्लेट भी गायब है। नोएडा में वारदात के बाद कार गाजियाबाद पहुंच गई। बड़ा सवाल यह है कि जिस वक्त बिना नंबर की सेल्टोस कार सड़क पर दौड़ रही थी तो गाजियाबाद पुलिस कहां थी। जबकि एसएसपी जिले में पुलिस विजिबिलिटी बढ़ाने का दावा कर रहे हैं।
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गाजियाबाद पुलिस की मुस्तैदी देखिए रातभर खड़ी रही कार, नहीं की पड़ताल
गाजियाबाद पुलिस अगर गंभीरता से कार के पार्किंग स्टीकर की पड़ताल रात में ही कर लेती तो नाकाबंदी कर बदमाशों को पकड़ा जा सकता है। सुबह होने पर पुलिस एक्टिव हुई और करीब 10 घंटे बाद नोएडा पुलिस को जानकारी मिली। इसके बाद हरकत दिखाई दी।