कुख्यात गैंगस्टर ने पेशी के दौरान प्रेमिका के साथ किया ऐसा काम, अदालत में देखते रहे गए वकील और पुलिस
अधिवक्ता जितेंद्र नागर ने बताया कि अनिल दुजाना बीते शुक्रवार को जिला अदालत में पेशी पर आया था। जबकि पूजा परिजनों के साथ दुल्हन के कपड़े पहने हुए पहुंची थी। इस दौरान अदालत में अनिल के शादी के लिए दिए गए शपथ पत्र पर हस्ताक्षर कराने की अनुमति मांगी गई। इसमें लिखा था कि पूजा और अनिल एक दूसरे को लगभग एक साल से जानते हैं और शादी करना चाहते हैं। अनुमति मिलने के बाद शपथ पत्र पर हस्ताक्षर किए गए। इसके बाद ही दोनों ने एक दूसरे को अंगूठी पहनाई। अदालत परिसर के दौरान परिजनों की भीड़ भी दिखाई दी। इसके बाद अनिल के परिजनों के साथ पूजा चली गई।
सूचना पर पहुंचे पुलिस अधिकारी
अनिल दुजाना व अन्य बड़े अपराधियों के पेशी पर आने के दौरान पुलिस बल जिला अदालत में मौजूद रहता है। अनिल के आने के दौरान मंगनी करने की सूचना पर पुलिस के आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे, लेकिन उन्हें अदालत की अनुमति से हस्ताक्षर कराने की जानकारी मिली। सीओ ग्रेटर नोएडा प्रथम श्वेताभ पांडे ने बताया कि सूचना मिलने पर हम जिला अदालत पहुंचे थे, लेकिन वहां पता चला कि अनिल ने शपथ पत्र पर हस्ताक्षर आदि अदालत की अनुमति से किए हैं।
अनिल दुजाना को जिला अदालत से अक्तूबर 2016 में 45 माह की सजा हो चुकी है। अनिल व उसके साथी मनोज पर वर्ष 2011 में डेरी मच्छा गांव में हुई विजय की हत्या का केस चला था। इस केस में पीड़ित पक्ष ने अनिल के पक्ष में बयान दिए थे। हालांकि, अदालत ने फरार होने के दोष में अनिल को 45 माह की सजा सुनाई थी। इसके अलावा अनिल पर हत्या, हत्या की कोशिश, रंगदारी आदि के कई केस चल रहे हैं। अधिवक्ता जितेंद्र नागर का कहना है कि सजा के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में स्टे है।
जिला पंचायत का चुनाव जीत चुका है अनिल
अनिल ने जेल में ही रहकर जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा था। वह चुनाव जीत भी गया था। हालांकि, परिसीमन नहीं होने के कारण अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं हो सका।
अदालत परिसर में नहीं हो सकते शादी-मंगनी या अन्य कार्यक्रम
इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता पंकज दुबे ने बताया कि अदालत परिसर में मंगनी या शादी समेत अन्य कार्यक्रम बिना अदालत की अनुमति से नहीं हो सकते। अगर किसी अपराधी को सजा हो चुकी है तो ऐसे अपराधी को इस तरह की अनुमति नहीं मिल सकती। अनिल दुजाना के मामले में वकील की तरफ से शपथ पत्र पर कोर्ट से अनुमति ली गई है, लेकिन इसमें कोर्ट परिसर में किसी आयोजन की अनुमति नहीं है। अगर कोर्ट परिसर में पुलिस के समक्ष यह सब कुछ हुआ तो जो पुलिस अपराधी को न्यायालय में लेकर आई है, उसकी जिम्मेदारी बनती है कि वह कानून का पालन करते हुए महाराजगंज जेल से गौतमबुद्धनगर न्यायालय व बाद में महाराजगंज जेल में अपराधी को पहुंचाए। बीच में कोई घटना या अन्य कार्य होता है तो कस्टडी में लेकर आए पुलिस वाले ही जिम्मेदार होते हैं।