समय दोपहर करीब 12:10 बजे। अचानक अजय खुराना की फैक्टरी से लोगों ने धुआं उठते देखा। अंदर से कर्मचारियों के चिल्लाने की आवाजें आने लगीं। फैक्टरी के पीछे की ओर पहली मंजिल पर लगी ग्रिल पर अचानक जलती हुई महिला पहुंची और खुद को बचाने की गुहार लगाने लगी। बेबस लोग उसे जलते हुए देखने के अलावा कुछ नहीं कर पाए। अंदर बाकी लोग भी इसी तरह बचाने के लिए चीख रहे थे।
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करोल बाग में फैक्ट्री में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
हादसे का चश्मदीद राज सिंह इस मंजर को बयां कर कांप रहा था। उसका कहना था कि उन लोगों के सामने ही आग में फंसे चारों लोग मदद मांगते-मांगते खामोश हो गए। 12:40 बचे बचाव दल पहुंचा तो अंदर से भगन, रामनरेशा, आशा और आरती के बुरी तरह जले हुए शव मिले। एक पड़ोसी परमानंद ने बताया कि यहां अजय खुराना की फैक्टरी करीब 15-20 साल से है।
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करोल बाग में फैक्ट्री में लगी आग
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भगन, रामनरेश, आशा, आरती और अजीत के अलावा कृष्णा और पूजा नामक महिलाएं भी यहां काम करती थीं। कृष्णा और पूजा की किस्मत अच्छी थी कि वे हादसे के समय लंच करने बराबर वाली फैक्टरी में चली गई थीं। अजीत ने बताया कि फैक्टरी के हॉल में एक पार्टीशन है। वह पार्टीशन के दरवाजे के पास केमिकल निकाल रहा था। इसी दौरान अचानक आग लगी तो उसने सभी से फौरन वहां से निकलने को कहा और जीने की ओर भागा।
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मौके पर जमा महिलाएं
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इधर, बाकी चारों केमिकल में भड़की आग में फंस गए। फैक्टरी में आने-जाने के लिए जीने के पास एक ही दरवाजा था। इसी दरवाजे के पास आग लग गई। इसी दौरान सभी वहां फंस गए। आग की चपेट में आने के बाद सभी पीछे खिड़की की ओर भागे, लेकिन वहां जाल लगा था।
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फैक्ट्री से निकलता पुलिसकर्मी
- फोटो : अमर उजाला
लोग वहां से मदद की गुहार लगाते रहे। चिल्लाते-चिल्लाते उनकी आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई। हादसे का पता चलते ही बराबर वाली बिल्डिंग में भगदड़ मच गई। लोग बराबर वाली बिल्डिंग की छत से दूसरी ओर कूद गए। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरा का माहौल था।