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डॉक्टरों की हड़ताल: 50 हजार मरीजों को नहीं मिला इलाज, 5 हजार ऑपरेशन टले

Sat, 03 Aug 2019 08:31 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Sat, 03 Aug 2019 08:31 AM IST
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fifty patients did not get treatment from doctors strike in Delhi
हड़ताल में परेशान होते मरीज - फोटो : अमर उजाला

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) विधेयक के विरोध में रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रही। इस वजह से लगभग 50 हजार मरीजों को बगैर इलाज कराए वापस लौटना पड़ा। इसके अलावा करीब पांच हजार से अधिक ऑपरेशन टालने पड़े। हड़ताल के कारण दूरदराज से आए मरीजों और उनके तीमारदारों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा। 



 

fifty patients did not get treatment from doctors strike in Delhi
इलाज के लिए आए मरीज - फोटो : अमर उजाला
राजधानी के अधिकतर अस्पताल खाली थे। एम्स और सफदरजंग में शुक्रवार को ओपीडी में पुराने मरीज भी बमुश्किल जांच कराते मिले। जबकि आपातकालीन विभाग भी सभी अस्पतालों में बंद कर दिए गए, जिसके चलते सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को भी अस्पतालों में भर्ती नहीं किया जा रहा था। उधर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के साथ प्रदर्शनकारी डॉक्टरों की बैठक भी बेनतीजा रही।

 
fifty patients did not get treatment from doctors strike in Delhi
डॉक्टरों की हड़ताल से परेशान दिखे मरीज - फोटो : अमर उजाला
बैठक में जब डॉ. हर्षवर्धन ने हिदायत देते हुए विधेयक में किसी भी प्रकार के संशोधन नहीं किए जाने और उसे लेकर डॉक्टरों में भ्रामक जानकारी होने की बात कही तो डॉक्टर भी मंत्री के गरम तेवर देख चकित रह गए। दोपहर बाद मंत्रालय से एम्स पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने अपना गुस्सा जाहिर किया और एम्स परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद एम्स परिसर में ही सभी चिकित्सीय संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक भी हुई जिसमें कुछ डॉक्टर हड़ताल के खिलाफ नजर आए। हालांकि अधिकतर डॉक्टरों का कहना था कि विधेयक में संशोधन होने के बाद ही हड़ताल खत्म की जाएगी। बैठक में डॉक्टरों को अलग अलग गुट में बटता देख देर रात को दोबारा सभी संगठनों की बैठक होने की जानकारी दी गई।


 
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fifty patients did not get treatment from doctors strike in Delhi
इलाज के लिए आए मरीज - फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार सुबह हड़ताल पर बैठे विविध चिकित्सीय संगठनों के प्रतिनिधियों को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने बातचीत के लिए बुलाया। यहां बैठक में डॉ. हर्षवर्धन ने पहले डॉक्टरों की पूरी बात सुनी और इसके बाद विभिन्न प्रावधानों को लेकर अपने तर्क रखे। बैठक खत्म होने के बाद डॉ. हर्षवर्धन ने बताया कि विधेयक में चिकित्सीय वर्ग के खिलाफ कोई प्रावधान नहीं है। बैठक में उन्होंने इसे लेकर पूरी जानकारी दी है और हड़ताल खत्म करने की अपील भी की। 
 
 
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हड़ताल से परेशान दिखे लोग - फोटो : अमर उजाला
उधर मंत्रालय से बाहर गुस्से में निकला प्रतिनिधि मंडल वहां से सीधे एम्स पहुंचा और यहां धरने पर बैठे डॉक्टरों को पूरी जानकारी दी गई। इसी बीच माहौल गरमा गया और सभी डॉक्टर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए एम्स परिसर में विरोध मार्च निकालने लगे। कुछ ही देर में डॉक्टर एम्स के गेट नंबर 1 से बाहर निकलने का प्रयास करने लगे तो वहां मौजूद पुलिस ने उन्हें बाहर जाने से रोक दिया। काफी देर बहस के बाद जब डॉक्टरों की एक ना चली तो वे गेट पर ही धरना देने के लिए बैठ गए। यहां काफी देर नारेबाजी के बाद आगे की रणनीति को लेकर एम्स सभागार में डॉक्टरों की बैठक हुई। यहां कोई हड़ताल के पक्ष में था तो कोई विरोध में। बात यहां तक भी हुई कि कुछ राजनैतिक पार्टियों के चिकित्सीय शाखा से जुड़े डॉक्टर भी हड़ताल में शामिल हो गए हैं। डॉक्टरों के बीच शुरू हुई इस बहस को देखते हुए बैठक को टालना पड़ गया। एम्स आरडीए के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह ने बताया कि शुक्रवार रात 10 बजे दोबारा बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में ही आगे की रणनीति को लेकर फैसला लिया जाएगा। 
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