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Mining in Aravali: 200 रुपये टन का माल बेचते हैं 1400 में, पुलिस सहित सभी विभागों की मिलीभगत से चल रहा धंधा

Fri, 22 Jul 2022 02:55 AM IST
Vikas Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फरीदाबाद Published by: Vikas Kumar Updated Fri, 22 Jul 2022 02:55 AM IST
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mining mafia in aravali takes out 200 rupees ton stone and sells it in the market for 1400
अरावली में होता अवैध खनन - फोटो : amar ujala

पुलिस पर हमला, रात-दिन गाड़ी चलाना और जेल जाने का भी डर नहीं। दरअसल खनन माफिया के इस दुस्साहस के पीछे मोटे मुनाफे का खेल जुड़ा है। पत्थर खनन में सारा खेल चोरी का है। मोटे मुनाफे के लिए अवैध खनन का पत्थर ढोने वाले डंपर चालक जान का रिस्क लेने से भी पीछे नहीं हटते। एक ट्रक चालक ने बताया कि हर चौकी-नाके पर दिए जाने वाले घूस का खर्चा ही पेट्रोल से ज्यादा बैठता है। इसमें ट्रैफिक पुलिस, थाना, चौकी के अलावा माइनिंग, आरटीए और वन सहित सभी विभाग शामिल हैं। कई बार सख्त अधिकारी आ जाने से काम पर फर्क पड़ता है। उस दौरान हमले आदि भी हो जाते हैं। गाड़ी मालिक साफ कहता है मौके से भाग जाना बाकी हम पर छोड़ देना।


 

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पत्थर से लदा ओवर लोड ट्रक - फोटो : amar ujala

जानकारों के मुताबिक जो ट्रक 10 टन तक माल लाने के लिए पास है, उस पर 20 से 22 टन तक भार लादा जाता है। इसमें आधे का बिल बनने के बाद बाकी सारा चोरी का माल होता है। पुलिस को इन वाहनों का चालान करने की पावर नहीं होती। कुछ महीनों तक पुलिस को कार्रवाई के लिए अधिकृत किया था। उस समय करोड़ों का राजस्व पुलिस ने खनन विभाग को दिया, लेकिन करीब तीन महीने पहले पुलिस से यह पावर वापस ले ली गई। 

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पत्थर से लदा ओवर लोड ट्रक - फोटो : amar ujala

क्या है जुर्माना और नियम
ओवरलोड ट्रक पहली बार पकड़े जाने पर 4.50 लाख, दूसरी बार में आठ लाख, तीसरी बार में 16 लाख और चौथी बार में गाड़ी को सीज करने का प्रावधान है। आरटीए विभाग को पावर होती है कि वह ट्रक को खनन के मामले में जब्त करे। ऐसा करने पर गाड़ी चालक व मालिक दोनों के जेल जाना पड़ता है। तीन महीने से पहले गाड़ी नहीं छूटती। मोटे चालान से बचने के लिए मंथली भी दी जाती है। दबाव बढ़ने पर खनन अधिकारी चालान की बजाय एफआईआर करवाकर दो दिन में गाड़ी छोड़ देते हैं। चालक जमानत पर बाहर आने के बाद दोबारा गाड़ी चलाने लगता है। 

पाली क्रशर जोन के प्रधान धर्मवीर भड़ाना बताते हैं कि सही बिल पर पत्थर लाने पर 600 रुपये प्रति टन का खर्चा आता है। इसमें 100 रुपये माल लोडिंग व टैक्स, 100 रुपये प्रति टन किराया, 200 रुपये टन के हिसाब से पिसाई जोड़ी जाती है। कमीशन व टोल आदि मिलाकर 1400 रुपये टन तक माल की कीमत हो जाती है। फिलहाल नारनौल व राजस्थान से बिल के साथ माल आता है। तावडू में जो पत्थर निकलता है। वह अवैध खनन का है। वह लाल और नीला मिक्स पत्थर है। चोरी से लाने वालों को यह मुश्किल से 200 रुपये टन मिलता है। जबकि बाजार में वह इसे 1400 रुपये प्रति टन के हिसाब से बेचते हैं।

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रेत खनन - फोटो : अमर उजाला

कोई ठेका नहीं छोड़ा फिर भी आसानी से मिल जाता है रेता
सूरजकुंड स्थित अरावली की पहाड़ी से लेकर यमुना नदी में अवैध खनन का सिलसिला जारी है। जनवरी से जुलाई मध्य तक फरीदाबाद पुलिस ने अवैध खनन करने के करीब 38 मामले दर्ज किए हैं। फरीदाबाद और पलवल जिले के करीब 60 किलोमीटर क्षेत्र में यमुना नदी बहती है। इसमें रेत खनन का कोई ठेका नहीं छोड़ा गया है। इसके बावजूद रेता आसानी से मिल जाता है। अरावली में चोरी-छिपे हो रहे खनन की रोक के लिए सामाजिक कार्यकर्ता कई बार सुप्रीम कोर्ट व एनजीटी में याचिका दायर कर चुके हैं।

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पत्थर लदा ट्रक - फोटो : amar ujala

ट्रक चलाने वालों में मेवात का दबदबा
पत्थर से भरे ट्रक को राजस्थान, नारनौल या तावडू से पाली तक लाना है तो चालक मेवाती ही होगा। दरअसल इन्हें सभी रास्तों के बारे में अच्छे से पता है। मात्र 12 से 15 हजार के वेतन के लिए ये लोग पुलिस पर हमला करने से भी नही चूकते। बेरोजगारी और कम पढे़ लिखे होने के कारण इन्हें दूसरा कोई काम नहीं मिलता। तकनीकी रूप से भी ये लोग गाड़ी के बारे में अच्छे से जानते हैं। कुछ तो ऐसे हैं जो ट्रक का इंजन तक खुद ही ठीक कर लेते हैं। एक-एक ड्राइवर पर पहले से कई  केस चलने के कारण इनका डर निकल चुका होता है। पुलिस या अन्य विभाग के लिए जो खर्चा इन्हें मिलता है, उसे बचाने के लिए पुलिस पर हमला कर देते हैं।

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