नोटबंदी के 50 दिनों के बाद जहां छोटे व मझोले उद्योगों पर असर पड़ा है वहीं भारतीय मीडिया पर भी इसका बुरा असर दिखना शुरु हो गया है। वर्ष 2017 की शुरुआत भारत में प्रिंट मीडिया के लिए अच्छी नहीं रही है। विशेषरूप से नोटबंदी के बाद कई छोटे-बड़े मीडिया हाउस तो बंदी के कगार पर हैं ही, बड़े समूहों ने भी छंटनी और तालाबंदी शुरू कर दी है। भारतीय मीडिया पर पड़ रहे बुरे असर पर एक रिपोर्ट
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(रिपोर्ट साभारः www.dw.com/)
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भारतीय प्रिंट मीडिया
- फोटो : सोशल मीडिया
-गौरतलब है कि हिंदुस्तान टाइम्स जैसे बड़े मीडिया घराने की ओर से अचानक सात ब्यूरो और संस्करणों को बंद करने के एलान कर दिया है जिससे प्रिंट मीडिया दहशत में है।
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भारतीय प्रिंट मीडिया
- फोटो : सोशल मीडिया
-वहीं दूसरी ओर, आनंदबाजार पत्रिका समूह(एबीपी ग्रुप) ने भी बड़े पैमाने पर छंटनी शुरू कर दी है जिसका असर उसके अंग्रेजी अखबार द टेलीग्राफ पर साफ नजर आने लगा है।
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भारतीय प्रिंट मीडिया
- फोटो : सोशल मीडिया
-कुछ समय पहले ही टाइम्स ग्रुप के मालिक विनीत जैन ने अपने ट्वीटर अकाउंट से ट्वीट कर बताया था कि में विज्ञापनों से आय घट रही है। उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स के संस्करण बंद करने के फैसले का भी समर्थन किया है।
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आदमपुर और रोहनिया में पुलिस ने किया बरामद
- फोटो : प्रतिकात्मक फोटो
-जिन संस्करणों को बंद करने का फैसला किया गया उनमें भोपाल, इंदौर, रांची, कानपुर, वाराणसी और इलाहाबाद के अलावा कोलकाता संस्करण शामिल हैं. उत्तर प्रदेश में अहम विधानसभा चुनावों से पहले वहां तीन-तीन ब्यूरो और संस्करण बंद करने का फैसला काफी अहम है। नौ जनवरी को इन संस्करणों के आखिरी अंक बाजार में आए थे।