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Delhi Stampede: ज्यादातर के छाती और पेट में चोट... टूट गई थीं निचले हिस्से की हड्डियां; सामने आई मौत की वजह
Mon, 17 Feb 2025 09:40 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 17 Feb 2025 09:40 AM IST
सार
दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में ज्यादातर मौतें दम घुटने से हुईं। ज्यादातर मृतकों को शरीर के निचले हिस्से में चोट लगी और हड्डियां टूट गई। दो सदस्यीय समिति ने भगदड़ मामले की जांच शुरू कर दी है।
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Delhi Stampede
- फोटो : अमर उजाला
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ को लेकर दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि प्रयागराज जाने वाली दो ट्रेनों के एक जैसे नाम के चलते भ्रम की स्थिति पैदा हुई। इससे ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्रियों में अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हुई और भगदड़ मच गई।
स्टेशन पर लगी भीड़
- फोटो : अमर उजाला
एक नाम वाली दो ट्रेनों पर भ्रम से मची भगदड़
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि प्रवागराज एक्सप्रेस और प्रयागराज स्पेशल नाम की दो समान नाम वाली ट्रेनों को लेकर भ्रम हुआ। अफरा-तफरी तब शुरू हुई, जब प्लेटफॉर्म संख्या 16 पर प्रयागराज स्पेशल ट्रेन के आने की घोषणा की गई। इस घोषणा से भ्रम की स्थिति पैदा हो गई, क्योंकि प्रयागराज एक्सप्रेस पहले से ही प्लेटफॉर्म संख्या 14 पर खड़ी थी। ऐसे में जो लोग प्लेटफॉर्म संख्या 14 पर अपनी ट्रेन तक नहीं पहुंच सके थे, उन्हें लगा कि उनकी ट्रेन प्लेटफॉर्म संख्या 16 पर आ रही है और वे उस तरफ भागे।
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि प्रवागराज एक्सप्रेस और प्रयागराज स्पेशल नाम की दो समान नाम वाली ट्रेनों को लेकर भ्रम हुआ। अफरा-तफरी तब शुरू हुई, जब प्लेटफॉर्म संख्या 16 पर प्रयागराज स्पेशल ट्रेन के आने की घोषणा की गई। इस घोषणा से भ्रम की स्थिति पैदा हो गई, क्योंकि प्रयागराज एक्सप्रेस पहले से ही प्लेटफॉर्म संख्या 14 पर खड़ी थी। ऐसे में जो लोग प्लेटफॉर्म संख्या 14 पर अपनी ट्रेन तक नहीं पहुंच सके थे, उन्हें लगा कि उनकी ट्रेन प्लेटफॉर्म संख्या 16 पर आ रही है और वे उस तरफ भागे।
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन हादसा
- फोटो : अमर उजाला
25 फीट चौड़ा था फुटओवर ब्रिज
नतीजतन वहां भारी भीड़ उमड़ पड़ी और भगदड़ मच गई। पुलिस ने बयान में कहा, इसके अतिरिक्त, प्रयागराज जाने वाली चार ट्रेनें थीं, जिनमें से तीन देरी से चल रही थीं, जिससे अप्रत्याशित भीड़ हो गई। प्लेटफॉर्म संख्या 12 से मगध एक्सप्रेस, 13 से स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस और 15 से भुवनेश्वर राजधानी रवाना होने वाली थी। जब प्रयागराज स्पेशल ट्रेन के प्लेटफॉर्म संख्या 16 पर आने की घोषणा हुई, तो इन प्लेटफॉर्म से भी लोग 16 की तरफ भागे। वहां तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता 42 सीढ़ियों वाले संकरे रास्ते से होते हुए 25 फीट चौड़ा फुटओवर ब्रिज था।
नतीजतन वहां भारी भीड़ उमड़ पड़ी और भगदड़ मच गई। पुलिस ने बयान में कहा, इसके अतिरिक्त, प्रयागराज जाने वाली चार ट्रेनें थीं, जिनमें से तीन देरी से चल रही थीं, जिससे अप्रत्याशित भीड़ हो गई। प्लेटफॉर्म संख्या 12 से मगध एक्सप्रेस, 13 से स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस और 15 से भुवनेश्वर राजधानी रवाना होने वाली थी। जब प्रयागराज स्पेशल ट्रेन के प्लेटफॉर्म संख्या 16 पर आने की घोषणा हुई, तो इन प्लेटफॉर्म से भी लोग 16 की तरफ भागे। वहां तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता 42 सीढ़ियों वाले संकरे रास्ते से होते हुए 25 फीट चौड़ा फुटओवर ब्रिज था।
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ट्रेन में चढ़ने को लेकर मारामारी
- फोटो : पीटीआई
सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश
अचानक लोगों के आने से सीढ़ियों पर भीड़ बढ़ गई और लोग फंस गए। उत्तर रेलवे के प्रधान मुख्य वाणिज्यिक प्रबंधक नरसिंह देव और प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त पंकज गंगवार की दो सदस्यीय समिति ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले। नरसिंह देव ने कहा, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी लेंगे। समिति कारणों का पता लगाने के साथ ही भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय भी सुझाएंगी। सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
अचानक लोगों के आने से सीढ़ियों पर भीड़ बढ़ गई और लोग फंस गए। उत्तर रेलवे के प्रधान मुख्य वाणिज्यिक प्रबंधक नरसिंह देव और प्रधान मुख्य सुरक्षा आयुक्त पंकज गंगवार की दो सदस्यीय समिति ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले। नरसिंह देव ने कहा, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी लेंगे। समिति कारणों का पता लगाने के साथ ही भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय भी सुझाएंगी। सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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विलाप करते परिजन
- फोटो : पीटीआई
मां के गम में डूबीं आंखें
दर्दनाक हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। दिल्ली के संगम विहार की पिंकी देवी (38), दो बेटियों और भाई के परिवार के साथ प्रयागराज जाने वाली ट्रेन का इंतजार कर रही थीं। भगदड़ में उनकी जान चली गई। दोनों बेटियां बेसहारा हो गई। पिंकी के भाई संजय कुमार ने बताया कि शनिवार को
प्लेटफॉर्म पर सीढ़ियों से उत्तर ही रहे थे कि अचानक भगदड़ मच गई। सैकड़ों लोग फंस गए, लेकिन बचाने कोई नहीं आया। मैंने किसी तरह अपनी बेटी और पत्नी को भीड़ से बाहर निकाला, लेकिन बहन पिंकी फंसी रह गई। बाद में बेहोशी की हालत में हम उसे अस्पताल लेकर भागे, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
दर्दनाक हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। दिल्ली के संगम विहार की पिंकी देवी (38), दो बेटियों और भाई के परिवार के साथ प्रयागराज जाने वाली ट्रेन का इंतजार कर रही थीं। भगदड़ में उनकी जान चली गई। दोनों बेटियां बेसहारा हो गई। पिंकी के भाई संजय कुमार ने बताया कि शनिवार को
प्लेटफॉर्म पर सीढ़ियों से उत्तर ही रहे थे कि अचानक भगदड़ मच गई। सैकड़ों लोग फंस गए, लेकिन बचाने कोई नहीं आया। मैंने किसी तरह अपनी बेटी और पत्नी को भीड़ से बाहर निकाला, लेकिन बहन पिंकी फंसी रह गई। बाद में बेहोशी की हालत में हम उसे अस्पताल लेकर भागे, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।