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हैदराबाद एनकाउंटर पर बोली दिल्ली- ठीक ही हुआ जो ठोक दिया, बाकी देखा जाएगा

Fri, 06 Dec 2019 05:44 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Fri, 06 Dec 2019 05:44 PM IST
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Delhi people reactions on Hyderabad encounter
हैदराबाद दुष्कर्म आरोपियों के एनकाउंटर पर खुशियां बनाती युवतियां - फोटो : पीटीआई

हैदराबाद एनकाउंटर का असर दिल्ली वालों पर भी चढ़कर बोला। ज्यादातर लोग हैदराबाद पुलिस की कार्रवाई के हक में खड़े दिखे। महिलाएं इस मामले में ज्यादा मुखर रहीं। इंडिया गेट पर मौजूद सुषमा बत्रा नाम की एक युवती ने तो यहां तक कहा कि ठीक ही हुआ, जो पुलिस ने चारों को ठोक दिया। बाकी जो होगा देखा जाएगा। 



Delhi people reactions on Hyderabad encounter
एनकाउंटर के बाद मिठाई खाती महिला - फोटो : पीटीआई
दुष्कर्म पीड़िता की आपबीती याद आने पर शरीर सिहर जाता है। हालांकि, कुछ लोगों ने एनकाउंटर के पक्ष में आ रही प्रतिक्रियाओं को न्यायपालिका की गिरती साख से भी जोड़कर देखा।

 
Delhi people reactions on Hyderabad encounter
एक दूसरे को मिठाई खिलाती महिलाएं - फोटो : पीटीआई

इंडिया गेट पर पहुंची करावल नगर की सोनी कुमारी का मानना है कि महिलाओं के साथ अपराध करने वालों को यही सजा मिलनी चाहिए। ऐसे अपराधियों को सरेआम गोलियों से भून देना चाहिए, फांसी पर लटका देना चाहिए। इससे अपराधियों के मन में डर पैदा होगा।

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Delhi people reactions on Hyderabad encounter
हैदराबाद पुलिस को नमन करते लोग - फोटो : पीटीआई

जबकि फोर्डा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पंकज सोलंकी कहते हैं कि हैदराबाद पुलिस ने बिलकुल सही किया। जघन्य अपराध करने वालों को यही दंड मिलना चाहिए। एनकाउंटर को जो भी देख रहा होगा, वह महिलाओं के साथ ऐसे अपराध करेगा, उन्हें ऐसी ही सजा मिलेगी।

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Delhi people reactions on Hyderabad encounter
मिठाई खिलाती महिलाएं - फोटो : पीटीआई

दूसरी तरफ एनकाउंटर को विरोध न करते हुए भी राजघाट पर पहुंची सोनम कहती हैं कि हैदराबाद पुलिस की कार्रवाई से मन में तो खुशी है, लेकिन इससे देश में न्याय व्यवस्था पर भरोसा ही कम हो जाएगा। हिंसा का जवाब हिंसा कैसे हो सकता है? साथ में मौजूद रोमा कहती हैं कि एनकाउंटर पर भले ही देश खुश हो, लेकिन क्या गारंटी है कि पुलिस ने जो किया वो सही किया। आरोपियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। चौराहे पर फांसी मिलनी चाहिए, लेकिन तब, जब न्यायालय की ओर से दोषी साबित हो।

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