हैदराबाद एनकाउंटर का असर दिल्ली वालों पर भी चढ़कर बोला। ज्यादातर लोग हैदराबाद पुलिस की कार्रवाई के हक में खड़े दिखे। महिलाएं इस मामले में ज्यादा मुखर रहीं। इंडिया गेट पर मौजूद सुषमा बत्रा नाम की एक युवती ने तो यहां तक कहा कि ठीक ही हुआ, जो पुलिस ने चारों को ठोक दिया। बाकी जो होगा देखा जाएगा।
2 of 5
एनकाउंटर के बाद मिठाई खाती महिला
- फोटो : पीटीआई
दुष्कर्म पीड़िता की आपबीती याद आने पर शरीर सिहर जाता है। हालांकि, कुछ लोगों ने एनकाउंटर के पक्ष में आ रही प्रतिक्रियाओं को न्यायपालिका की गिरती साख से भी जोड़कर देखा।
3 of 5
एक दूसरे को मिठाई खिलाती महिलाएं
- फोटो : पीटीआई
इंडिया गेट पर पहुंची करावल नगर की सोनी कुमारी का मानना है कि महिलाओं के साथ अपराध करने वालों को यही सजा मिलनी चाहिए। ऐसे अपराधियों को सरेआम गोलियों से भून देना चाहिए, फांसी पर लटका देना चाहिए। इससे अपराधियों के मन में डर पैदा होगा।
4 of 5
हैदराबाद पुलिस को नमन करते लोग
- फोटो : पीटीआई
जबकि फोर्डा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पंकज सोलंकी कहते हैं कि हैदराबाद पुलिस ने बिलकुल सही किया। जघन्य अपराध करने वालों को यही दंड मिलना चाहिए। एनकाउंटर को जो भी देख रहा होगा, वह महिलाओं के साथ ऐसे अपराध करेगा, उन्हें ऐसी ही सजा मिलेगी।
5 of 5
मिठाई खिलाती महिलाएं
- फोटो : पीटीआई
दूसरी तरफ एनकाउंटर को विरोध न करते हुए भी राजघाट पर पहुंची सोनम कहती हैं कि हैदराबाद पुलिस की कार्रवाई से मन में तो खुशी है, लेकिन इससे देश में न्याय व्यवस्था पर भरोसा ही कम हो जाएगा। हिंसा का जवाब हिंसा कैसे हो सकता है? साथ में मौजूद रोमा कहती हैं कि एनकाउंटर पर भले ही देश खुश हो, लेकिन क्या गारंटी है कि पुलिस ने जो किया वो सही किया। आरोपियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। चौराहे पर फांसी मिलनी चाहिए, लेकिन तब, जब न्यायालय की ओर से दोषी साबित हो।