दिल्ली-एनसीआर एक गैस चैंबरः दरवाजे-खिड़कियां बंद करके रखें, फेफड़ों पर पड़ सकता है बुरा असर
दिल्ली के मैक्स अस्पताल के डॉ. रजनीश मल्होत्रा बताते हैं कि धुंध की वजह से ओपीडी में करीब 20 प्रतिशत तक मरीजों की संख्या बढ़ी है। जो मरीज आए हैं, उनमें से 85 प्रतिशत मरीज 40 साल से अधिक उम्र के हैं। वहीं आई 7 क्लिनिक के डॉ. संजय चौधरी का मानना है कि धुंध की वजह से आंखों में संक्रमण भी बढ़ रहा है। जरूरी है लोग इस वक्त एहतियात बरतें। एम्स के हालात भी कुछ इसी तरह से हैं। यहां प्लमोनरी विभाग के डॉ करण मदान के अनुसार प्रदूषित कणों से बचाव आसान नहीं है। लोगों के फेफड़ों पर बुरा असर पड़ रहा है। फेफड़ों में कैंसर और श्वसन की बीमारियों का खतरा बढ़ा है।
सफदरजंग अस्पताल में हर दिन बढ़ रहे मरीज
सफदरजंग अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. जुगल किशोर ने बताया कि सोमवार से बुधवार के बीच हर दिन करीब 200 से 250 के बीच अस्पताल की ओपीडी हुई है। जबकि आम दिनों में यह आंकड़ा 200 से कम ही रहता है। उन्होंने अस्थमा के मरीजों को सख्त हिदायत है कि वह कुछ दिनों तक घर में ही रहें। दरवाजे-खिड़कियां बंद करके रखें। क्योंकि हवा में भारी मात्रा में मिले धूल कण घर के पर्दों, कारपेट, बिस्तर, पालतू जानवरों के बालों और कई अन्य चीजों पर जम जाते हैं। ऐसे में सांस लेने पर वह कण शरीर के अंदर जाते हैं ।
अस्थमा मरीजों को पड़ रहा है अटैक
बाबू जगजीवन राम अस्पताल के डॉ. अंकित ओम बताते हैं कि अस्पताल में सांस लेने वाले मरीजों की संख्या तो बढ़ी ही है, इसके साथ ही अस्थमा के अटैक के केस भी आ गए हैं। अमूमन अस्थमा अटैक के केस सर्दियों में या फिर कभी-कभी अधिक बारिश के मौसम में आते हैं। लेकिन इस बार पिछले दो दिन में चार से पांच केस अटैक के अस्पताल में आ चुके हैं ।
क्या कहते हैं आंकड़ें
विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों की बात करें तो भारत में अस्थमा के कुल रोगी 15 से 20 करोड़ हैं। बदलते लाइफस्टाइल के चलते ये बीमारी बच्चों में भी फैल रही है। मौजूदा वक्त में कुल 12 प्रतिशत से अधिक बच्चे अस्थमा से पीड़ित हैं। साल 2016 में आई एक रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में अस्थमा के मरीजों के कुल 10 फीसदी मामले अकेले भारत में हैं।