तीमारदारों के परिजन कृपया ध्यान दें... मुंडका की इमारत में लगी आग बुझ गई है। यदि आपके परिजन भी घटना में शामिल थे तो अस्पताल प्रशासन को सूचना दें। संजय गांधी अस्पताल में बार-बार की जा रही यह घोषणा कुछ देर के लिए चुप्पी पैदा कर देती थी, लेकिन इसके अगले पल ही परिजनों की चीख-पुकार चुप्पी को तोड़ रही थी। रोते-बिलखते परिजनों के गमजदा चेहरों पर आंसू अपनों की तलाश में मोर्चरी के दरवाजे पर बार-बार बहते और सूखते रहे।
मुंडका इलाके की इमारत में लगी आग में लापता लोगों के परिजन शुक्रवार देर रात से ही अस्पताल में पहुंचना शुरू हो गए थे। शनिवार सुबह तक यहां बड़ी संख्या में परिजनों की भीड़ पहुंच गई थी। भीड़ को देखते हुए अस्पताल में वालंटियर व दिल्ली पुलिस के जवानों को तैनात किया गया था। इस बीच अस्पताल प्रशासन की ओर से बार-बार मुंडका इलाके की घटना को लेकर घोषणा की जा रही थी। पीड़ितों के परिजनों के लिए अस्पताल में एक हेल्प डेस्क भी बनाई गई, जहां घायलों के सूची में नाम जोड़े जा रहे थे।
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Delhi Mundka Fire
- फोटो : अमर उजाला
घटना के बाद से गायब अपने परिजनों की तलाश में संजय गांधी अस्पताल में दिन भर परिजन चिलचिलाती धूप में अपनों को ढूंढते रहे। कोई फोन तो कोई हाथों में पासपोर्ट साइज फोटो लेकर पुलिस व अस्पताल प्रशासन के आगे गिड़गिड़ाता रहा।
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- फोटो : अमर उजाला
आंखों में आंसू लिए बस एक ही इच्छा थी कि अपने मिल जाएं, लेकिन शवों के अधिक जलने के कारण परिजन भी अपने परिवार के लोगों को पहचान नहीं सके। थक-हारकर परिजन मोर्चरी के गेट पर ही रोते-बिलखते रहे। इस बीच परिजनों को सांत्वना देने के लिए उनके पड़ोस में रहने वाले लोग भी फूट-फूटकर रोते हुए नजर आए।
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- फोटो : अमर उजाला
कोरोना ने एक साल पहले मेरी पति को छीन लिया और अब मेरी बेटी मुझसे दूर है। मैंने किसी का क्या बिगाड़ा है। कोई मेरी बेटी को मुझसे मिला दो, मैं बस एक बार उसे अपने सीने से लगाना चाहती हूं, लेकिन डॉक्टर कुछ भी नहीं बोल रहे हैं। यह बार-बार कहते ही सुनीता बेहोश हो गई।
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- फोटो : अमर उजाला
सुनीता अपने परिवार के साथ मुंडका के प्रेमनगर इलाके में रहती हैं। परिवार में बड़ी बेटी सोनम व एक छोटी बेटी और एक बेटा है। सुनीता ने बताया कि बेटी सुबह फैक्टरी पहुंच गई थी और जल्दी आने के की बात कहकर गई थी, लेकिन अभी तक बेटी का कुछ पता नहीं है। घायलों में बेटी नहीं है और मोर्चरी में लाशों का ढेर लगा हुआ है। डॉक्टर शवों में पहचान करने के लिए कह रहे हैं, लेकिन सभी शव इतनी बुरी तरह जल गए हैं कि कुछ भी पहचान में नहीं आ रहा है। ऐसे में मैं अपनी बेटी की तलाश कैसे करूं। बीते वर्ष ही मेरे पति को कोरोना ने निगल लिया था, जिसके बाद बेटी घर की जिम्मेदारी निभा रही थी, लेकिन अब आग ने मेरे सहारे को भी मुझसे दूर कर दिया।