किराया बढ़ने के बाद मेट्रो से दूरी बनाने वाले यात्रियों ने डीटीसी बसों में सफर नहीं किया है। माना जा रहा था कि किराया कम होने की वजह से मेट्रो के ये यात्री डीटीसी बसों की तरफ गए हैं, मगर आंकड़ों पर गौर करें तो मेट्रो में किराया बढ़ने के बाद जहां रोज 1.50 लाख यात्री घटे हैं, वहीं डीटीसी बसों में 4.40 लाख यात्री रोज घट गए हैं।
किराया बढ़ने से DELHI METRO से यात्रियों ने बनाई दूरी, DTC बसों में भी नहीं किया सफर
मेट्रो का किराया 10 मई को बढ़ा है। उसके बाद जून में मेट्रो से सफर करने वाले प्रतिदिन 1.50 लाख यात्री घट गए। माना जा रहा था कि इसके बाद डीटीसी में यात्रियों की संख्या में इजाफा हुआ होगा, मगर इसके उलट अगर डीटीसी बसों में जून 2017 में सफर करने वालों की बात करें, तो यह संख्या 7.74 करोड़ है। अगर इसकी तुलना बीते साल के जून 2016 से करें, तो तब पूरे माह में 9.06 करोड़ ने सफर किया था। मसलन इसमें 1.32 करोड़ की कमी आई है, यानी 4.40 लाख यात्री प्रतिदिन कम हुए हैं।
डीटीसी की पहली तिमाही (अप्रैल, मई, जून) में यात्रियों की संख्या में बीते साल 2016 की पहली तिमाही के मुकाबले भी 6.8 करोड़ की कमी आई है। 2016 की पहली तिमाही में 30.72 करोड़ ने सफर किया था, जो अब 2017 की पहली तिमाही में घटकर 23.92 करोड़ रह गए हैं। हालांकि डीटीसी के अधिकारी इसके पीछे लगातार घटती बसों की संख्या को वजह मानते हैं। उनके मुताबिक, बीते एक साल में उनके बेड़े से करीब 1000 बसें भी हटी हैं।
डीटीसी के आंकड़ों पर गौर करें, तो मेट्रो का किराया बढ़ने के बाद कम दूरी का सफर करने वाले यात्रियों की संख्या में मामूली इजाफा हुआ है। डीटीसी अधिकारियों के मुताबिक, अप्रैल 2017 में 7.80 करोड़ लोगों ने सफर किया। तब डीटीसी की प्रतिदिन प्रति बस की कमाई 5988 रुपये थी। मेट्रो किराया बढ़ने के बाद मई में अप्रैल के मुकाबले डीटीसी में यात्रियों की संख्या बढ़कर 8.38 करोड़ पहुंच गई, मगर प्रतिदिन प्रति बस की कमाई महज 5625 रुपये रह गई। इसमें इजाफा नहीं हुआ। डीटीसी अधिकारी की मानें तो इसकी वजह है कि कम दूरी वाले यात्रियों की संख्या बढ़ी है, जिससे यात्री तो बढ़े पर कमाई नहीं बढ़ी।
किराया बढ़ने के बाद 1.50 लाख मेट्रो से, तो 4.40 लाख यात्री डीटीसी से दूरी बना रहे हैं। अगर यात्री इन दोनों सबसे बड़ी परिवहन व्यवस्था से नहीं जुड़ रहे, तो कहां जा रहे हैं। जानकारों की मानें तो किराया बढ़ने के बाद यात्री निजी वाहन या फिर कैब सेवाओं की ओर रुख कर रहे हैं। शेयरिंग कैब की मांग बढ़ने की एक बड़ी वजह भी यही है। कैब उन्हें सीधे घर से उठाती है। मेट्रो पार्किंग और किराया को जोड़ दें, तो लगभग बराबर का खर्च आता है। ऐसे में जानकार मानते हैं कि यात्रियों ने निजी वाहनों के साथ शेयरिंग कैब सेवाओं का प्रयोग शुरू किया है।