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दिल्ली मेट्रो ने सिर्फ यात्रियों के ही नहीं ऑटोरिक्शा चालकों के चेहरे पर भी लौटाई मुस्कान, जगने लगी है नई उम्मीद

Mon, 07 Sep 2020 03:38 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Mon, 07 Sep 2020 03:38 PM IST
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Metro in Delhi News: Delhi metro gives new hope to not only passengers but also auto rikshaw drivers and other public transport drivers they now hope of earning more
मेट्रो स्टेशन के बाहर खड़े ऑटो चालक - फोटो : शुभम बंसल

Metro Open In Delhi: दिल्ली मेट्रो को दिल्ली-एनसीआर की लाइफलाइन यानी जीवन रेखा यूं ही नहीं कहते। बीते 169 दिनों के बाद जब आज यह दोबारा पटरी पर लौटी है तो इसने एक साथ कई वर्ग को राहत पहुंचाई है। इससे न सिर्फ कई महीने से परेशानी झेलकर अपने गंतव्यों तक पहुंच रहे यात्रियों को राहत मिली है बल्कि मेट्रो के स्टाफ समेत समाज कई तबके की नई उम्मीद जगी है। हमारी इस स्टोरी में पढ़ें आखिर क्यों दिल्ली मेट्रो का चलना इतना जरूरी था और यह ऑटोरिक्शा चालकों से लेकर बैटरी रिक्शा व साइकिल रिक्शा चालकों के लिए वरदान है, तस्वीरें भी देखें...

Metro in Delhi News: Delhi metro gives new hope to not only passengers but also auto rikshaw drivers and other public transport drivers they now hope of earning more
ऑटोरिक्शा चालक सादिक - फोटो : सर्वेश कुमार

मेट्रो चलने से जिस वर्ग के चेहरे पर उम्मीद की एक नई किरण फिर जगी है वो है ऑटोरिक्शा चालक, बैटरी रिक्शा चालक, साइकिल रिक्शा चालक व अन्य। इस बात को समझने के लिए आपको ऑटोरिक्शा चालक सादिक की कहानी जाननी होगी। सादिक उन तमाम ऑटोरिक्शा चालकों की तरह आम चालक है जो लॉकडाउन से पहले एक ऑटो चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर एक अच्छी जिंदगी बसर कर रहा था।

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ऑटो से उतरती सवारी - फोटो : शुभम बंसल

वह लॉकडाउन से पहले द्वारका के मेट्रो स्टेशनों पर जाया करता था और सवारियां लाने-ले जाने का काम करता था। लॉकडाउन के शुरुआती महीनों में तो इसका धंधा पूरी तरह से बंद हो गया। परिवार का पेट पालने की भी समस्या आ गई। जैसे-तैसे सादिक ने वो दिन गुजारे। जब धीरे-धीरे दिल्ली अनलॉक होने लगी तो सादिक ने फिर अपना ऑटो चलाने का काम शुरू किया लेकिन सवारियां बहुत मुश्किल से मिलतीं।

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सवारियों का इंतजार करते ऑटोरिक्शा चालक - फोटो : शुभम बंसल/हिमांशु सोनी

आज जब मेट्रो दोबारा से आम लोगों के लिए खुल गई है तो सादिक जैसे ही कई ऑटोरिक्शा चालकों की उम्मीद बढ़ गई है अब उनकी जिंदगी दोबारा सामान्य होगी। दोबारा उन्हें सवारियां मिलेंगी और उनकी परेशान जिंदगी फिर से पटरी पर लौटेगी। सादिक के चेहरे की चमक बताती है कि भले ही पहले दिन बहुत ज्यादा लोगों ने मेट्रो से सफर नहीं किया लेकिन आने वाले दिनों में जब मेट्रो के यात्रियों की संख्या बढ़ेगी तो उनकी खुशहाली भी लौटेगी।

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विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन के बाहर से ही सामाजिक दूरी के नियमों का पालन कराते सुरक्षाकर्मी - फोटो : हिमांशु सोनी

ऑटो, रिक्शा, बैटरी रिक्शा चालकों का उत्साह इसी बात से देखा जा सकता है कि आज जब एक सवारी उस ऑटो में बैठ गई जो बाद में आकर खड़ी हुई थी तो बाकी चालक जो पहले से सवारियों के लिए खड़े थे उनमें कुछ तीखी बहस हो गई। सवारी देखकर उनका हाल वैसा ही था जैसे कई दिनों मनचाही चीज मिली हो। उनका उत्साह बताता है कि कोरोना के डर को मात देकर जिंदगी फिर से पटरी पर जरूर लौटेगी और मेट्रो का चलना इसमें एक बड़ा सकारात्मक कदम हो सकता है। हालांकि इन सबके बीच लोगों ने अगर सामाजिक दूरी का ध्यान नहीं रखा तो प्रशासन को मजबूरन कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं।

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