"भैया मैं मरने वाला हूं, खतम होने वाला हूं, यहां आग लग गई है। मैं कमरे में हूं और यहां से भागने का कोई रास्ता नहीं है। सांस नहीं ली जा रही है भईया। आप घर का और बच्चों का ख्याल रखना और...." इसके आगे बोलते बोलते उसकी सांसें फूलने लगीं। जोर-जोर से सांस खींचते हुए उसने देखा कि चारों ओर फैले धुएं के बीच वह अपनी मौत से घिर गया है।
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Delhi Fire
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली के अनाज मंडी इलाके में जिस समय लोग चीख-चिल्ला कर मदद मांग रहे थे, उस समय अंदर फंसे मुशरफ अली नाम के शख्स ने अपनी मौत को सामने देख दोस्त को कॉल किया। आखिरी समय में उन दोनों के बीच जो बातचीत हुई उसे पढ़कर कोई भी अंदर तक सिहर जाए। बिल्डिंग के अंदर फंसे शख्स ने रोते हुए अपने बताया कि कई लोग उसके साथ फंसे हुए हैं और अब वो सांस भी नहीं ले पा रहे हैं।
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इसके बाद आग की लपटों से घिरे और धुएं में फंसे शख्स ने लंबी-लंबी तेज सांसों के साथ भर्राए गले से अपने दोस्त मोनू को जिस तरह पूरी बातें बताईं, उससे बिल्डिंग के अंदर फंसे लोगों के मन का डर साफ झलक रहा था। उसने बताया कि कैसे दमकल की गाड़ियों को आने में देर हो रही है। कैसे छठी मंजिल पर लगी आग की लपटें उनलोगों तक पहुंचने लगी हैं। उसने बताया कि अब धुएं से उसका भी दम घुटने लगा है।
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फोन में दूसरी ओर उसका दोस्त समझाता रहा कि चिंता मत करो, तुम्हें कुछ नहीं होगा... लेकिन उसे क्या पता था कि अगले ही पल उसके दोस्त का दम घुट जाएगा और भीषण आग उसके शरीर को इस कदर झुलसा देगी कि वह खुद ही अपने दोस्त के शव की पहचान नहीं कर पाएगा।
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रविवार सुबह अनाज मंडी इलाके की अवैध फैक्टरी बिल्डिंग में आग की ऊंची-ऊंची लपटों के बीच घिरा यह व्यक्ति उस खौफनाक मंजर से अकेला नहीं गुजर रहा था। उसके साथ फैक्टरी में काम करने वाले वो तमाम मजदूर भी सांस लेने के लिए छटपटा रहे थे, जो दिनभर काम कर के रोज रात में वहीं सो जाया करते थे।