दिल्ली: आखिर क्यों मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा-हम मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन को लोन पर देने को तैयार, पढ़ें पूरी खबर
दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में वाकई शिक्षा क्रांति हो रही है। देश के कई शानदार प्राइवेट स्कूलों में ऐसी सुविधा नहीं है जैसी सुविधाएं दिल्ली के सरकारी स्कूलों में हैं। इस साल 3,70,000 बच्चों ने निजी स्कूल से नाम कटाकर सरकारी स्कूल में एडमिशन लिया है, इससे बड़ा सर्टिफिकेट क्या होगा। मात्र तीन साल में 12430 क्लास बनकर तैयार हो गए हैं। यह भी अपने आप में इतिहास है। मैं सभी दिल्लीवासियों और बच्चों को बधाई देता हूं।
दूसरे राज्य चाहें तो सिसोदिया और जैन को ले लें लोन पर
दिल्ली में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कामों को लेकर बोलते वक्त मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली में इतना अच्छा काम हो रहा है इसलिए आज मैं एक प्रस्ताव इस मंच से रखना चाहता हूं कि देश का कोई भी राज्य जो अपनी शिक्षा व्यवस्था दिल्ली की तरह करना चाहता है उसे हम कुछ दिन के लिए मनीष सिसोदिया जी को लोन पर दे देंगे। दिल्ली में अस्पताल और मोहल्ला क्लीनिक भी बड़े अच्छे हो गए। अगर दूसरे राज्य अपने यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था दिल्ली जैसी करना चाहते हैं तो हम उन्हें कुछ दिन के लिए सत्येंद्र जैन को लोन पर दे देंगे। मुख्यमंत्री की यह बात सुनकर पहले तो दोनों मंत्रियों ने उन्हें देखा फिर सभी हंस पड़े।
सीएम क्यों बोले हर जगह चुनाव लड़ना हमारा मकसद नहीं
हमारा ये मकसद नहीं है कि हर जगह चुनाव लड़कर जीतें। हम कोई नेपोलियन नहीं हैं कि घोड़ा लेके चले और जीत हासिल की, हमारा मकसद देश है। हम चाहते हैं कि कोई राज्य अच्छा काम करना चाहता तो करे, हम उसकी मदद के लिए तैयार हैं। हम चाहते हैं कि देश आगे बढ़े, सभी मिलकर विकास करें। अच्छा काम करके उन्हें वोट मिलता है वो जीतते हैं तो अच्छी बात है, हमें क्या करना है।
नेताओं का सबसे बड़ा स्कूल है- केजरीवाल
मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा कि नेताओं को सबसे बड़ा डर स्कूल से लगता है। अगर अच्छे स्कूल बन गए तो नेताओं की जाति-धर्म की राजनीति खत्म हो जाएगी। इन स्कूलों में बच्चे कट्टर देशभक्त निकलेंगे। ये बच्चे देश के विकास के नाम पर वोट देंगे। ये लोग कहते हैं कि केजरीवाल सब फ्री में दे रहा है। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि अगर मैं स्कूलों में गरीबों के बच्चों को फ्री शिक्षा दे रहा हूं, अस्पतालों में गरीबों को फ्री इलाज दे रहा हूं तो इससे किसे परेशानी है। भगत सिंह ने एक नारा दिया था 'इंकलाब जिंदाबाद'... आज मैं एक नारा दे रहा हूं 'इंकलाब जिंदाबाद, शिक्षा क्रांति जिंदाबाद...'।