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विमल इलायची विज्ञापन विवाद: शाहरुख-अजय-टाइगर को झटका, कंपनी की याचिका कोर्ट ने की खारिज; जानें पूरा मामला

Mon, 14 Sep 2026 07:57 PM IST
Rahul Kumar Tiwari पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Mon, 14 Sep 2026 07:57 PM IST
सार

बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को लेकर विमल इलायची का विज्ञापन विवादों में आ गया था। महाराष्ट्र एफडीए के नोटिस के खिलाफ कंपनी हाईकोर्ट पहुंची, लेकिन अदालत ने याचिका खारिज कर दी। आखिर मामला क्या है? जानिए पूरा विवाद और हाईकोर्ट के फैसले की वजह।

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High Court dismisses company plea in Vimal Elaichi advertisement controversy case
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को विमल इलायची के निर्माताओं की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें ब्रांड एंबेसडर शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस को रद्द करने की मांग की गई थी। एफडीए ने विज्ञापनों में उत्पाद को कथित तौर पर गलत तरीके से पेश करने को लेकर ये नोटिस जारी किए थे।
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न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र के अभाव में यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की अदालतें इस मामले में याचिकाकर्ता की शिकायतों को उठाने के लिए अधिक उपयुक्त और सुविधाजनक मंच हैं। यह टिप्पणी ‘फोरम कन्वीनियंस’ के सिद्धांत के तहत की गई।
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याचिका दायर करने वाली कंपनी पीबी एग्रो एलएलपी ने कहा कि वह ‘विमल’ ब्रांड के तहत इलायची उत्पाद के प्रचार के लिए प्रतिष्ठित अभिनेताओं की सेवाएं लेती है। कंपनी ने कहा कि इन कलाकारों के साथ किए गए उसके प्रचार समझौते लागू कानूनों के पूरी तरह अनुपालन में हैं।

याचिका में कहा गया कि महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने नियामकीय नोटिस जारी करते हुए आरोप लगाया कि विमल इलायची के विज्ञापन, महाराष्ट्र में प्रतिबंधित चबाने वाले उत्पाद विमल पान मसाला का परोक्ष प्रचार करते हैं।

याचिका के अनुसार, महाराष्ट्र एफडीए ने विमल इलायची के विज्ञापनों में शामिल अभिनेताओं को ऐसे दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था, जिनसे यह साबित हो सके कि विमल इलायची प्रतिबंधित पान मसाला उत्पादों से अलग उत्पाद है। एफडीए ने प्रचार अभियान रोकने और डिजिटल मंचों पर इससे संबंधित सामग्री हटाने को भी कहा था।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि 11 अगस्त का एफडीए नोटिस केवल अभिनेताओं को भेजा गया था और कंपनी को नहीं भेजा गया, जबकि राज्य नियामक की किसी भी कार्रवाई से कंपनी को ही अपूरणीय नुकसान होने वाला है। वकील ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता को अपना पक्ष रखने का अवसर तक नहीं दिया गया।
 
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