Delhi Election 2020: असल मुद्दों से भटक गया चुनाव, न प्रदूषण का जिक्र न ऑड ईवन की बात
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदूषण
प्रदूषण की बात हवा
दिल्ली में प्रदूषण के सभी मानक तोड़ डाले। प्रदूषण का इतना स्तर दिल्ली में कभी देखा नहीं गया था। खासतौर पर पड़ोसी राज्यों में किसानों द्वारा पराली जलाने के कारण हालात बदतर हो गए। सुप्रीम कोर्ट में दखल देना पड़ा और उसने राज्य सरकारों और केंद्र को फटकार भी लगाई। अधिकारियों को अदालत में तलब किया गया। कई बार निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लगाया गया। स्कूलों की छुट्टी तक करनी पड़ी। राज्य सरकारों के बीच आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति चलती रही। लेकिन चुनाव में ये मुद्दा पूरी तरह से गायब हो गया। हालांकि पार्टियों के घोषणापत्र में प्रदूषण से मुक्ति दिलाने का वादा किया गया है, लेकिन प्रचार के दौरान सभी दल इसपर चुप ही रहे।
ऑड ईवन
कहां गया ऑड ईवन
दिल्ली में प्रदूषण एक कारण वाहनों से निकलने वाला धुआं भी है। इसके लिए केजरीवाल सरकार ने पहल करते हुए दिल्ली में ऑड ईवन लागू किया। दिल्ली सरकार का यह मानना है कि ऑड ईवन से दिल्ली को प्रदूषण से बहुत राहत मिली है। मगर दूसरी ओर भाजपा इसका खुलकर विरोध करती रही। भाजपा का मानना है कि केजरीवाल सरकार ने अपनी राजनीति चमकाने के लिए लोगों को परेशान किया है। भाजपा का कहना है कि ऑड ईवन से प्रदूषण में तो कोई राहत नहीं मिली बल्कि अव्यवस्था जरूर फैली है और लोगों को भारी परेशानी का सामना उठाना पड़ा। लेकिन पूरे चुनाव प्रचार में किसी भी मंच से ऑड ईवन के पक्ष या विपक्ष में कुछ भी सुनने को नहीं मिला। मुद्दा पूरी तरह हवा हो गया।
कानून-व्यवस्था
कानून-व्यवस्था का मुद्दा
आम आदमी पार्टी की सरकार पूरे पांच साल दिल्ली की कानून-व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार को कोसती रही। केजरीवाल सरकार ने दुष्कर्म के मुद्दों पर भी दिल्ली की कानून व्यवस्था पर कई बार सवाल उठाए। आप सरकार ने यह मांग भी उठाई कि दिल्ली पुलिस उन्हें सौंप दी जाए तो वो दिल्ली की कानून व्यवस्था बेहतर कर सकते हैं। केजरीवाल ने कई बार केंद्र सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि वे पुलिस व अन्य एजेंसियों को उनके और उनकी पार्टी के नेताओं के खिलाफ इस्तेमाल कर रही है। इस बीच दिल्ली में अपराधों का भी बोलबाला रहा। कहीं पुलिस पिटी तो कहीं घिरी। मगर चुनाव में यह मुद्दा कहां गायब हो गया, पता ही नहीं चला।
पूर्ण राज्य का दर्जा
पूर्ण राज्य का वादा
आम आदमी पार्टी ने अपने घोषणापत्र में दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का वादा किया है। केजरीवाल सरकार ने चुनाव की घोषणा से पहले तक पूर्ण राज्य के मुद्दे को जमकर भुनाने की कोशिश की। इसे लेकर आम आदमी पार्टी ने आंदोलन भी खड़ा किया, पर चुनाव से कुछ समय पहले पूरा आंदोलन फीका पड़ गया। चुनाव में भी आम आदमी पार्टी के किसी नेता ने खुलकर इसका जिक्र नहीं किया। चौंकाने वाली बात यह है कि भाजपा की ओर से साल 2013-2014 में दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का वादा किया था। लेकिन ये मुद्दा भी इस चुनाव में कहीं दब गया।