दिल्ली की छठीं विधान सभा का बजट सत्र इस बार लंबा चला। 16 दिनों तक चले सत्र में नियत समय से चार घंटे ज्यादा काम हुआ। हालांकि, इसके लिये सत्र का समय चार बार बढ़ाया भी गया था।
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दिल्ली विधानसभा।
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इसकी जानकारी विधान सभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने सत्रावसान के दूसरे दिन बृहस्पतिवार को विधान सभा सचिवालय मीडिया को दी। राम निवास गोयल के मुताबिक, उपराज्यपाल के अभिभाषण से शुरू हुई विधान सभा ने इस बार कई मामलों में दिल्ली के लिये मील का पत्थर साबित होगी।
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delhi assembly
- फोटो : अमर उजाला
सदन ने आउटकम व आइम लाइन बजट पेश करने से सरकार विधान सभा के प्रति ज्यादा उत्तरदायी बनी है। अब विधायक दिल्ली सरकार से सवाल कर सकेंगे कि नियत समय में कोई काम पूरा क्यों नहीं हुआ। वहीं, उपराज्यपाल कार्यालय का आटकम रिपोर्ट पेश हुयी। पूरे सत्र के दौरान सीएजी रिपोर्ट समेत कुछ 95 दस्तावेज सदन में पेश किये गये।
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दिल्ली विधानसभा में विरोध
- फोटो : विवेक निगम/अमर उजाला, नई दिल्ली
गोयल ने बताया कि सदन को कुछ 667 सूचनाएं मिली। यह 160 तारांकित सवालों व 461 अतरांकित सवालों के लिये स्वीकार की गयी। 69 तारांकित व 138 अतारांकित सवालों को सदन में पूछा भी गया। हालांकि, आरक्षित विषय होने से उपराज्यपाल कार्यालय से जुड़े 36 सवाल के जवाब नहीं मिल सके। इन्हें प्रश्न व संदर्भ समिति व विशेषाधिकार समिति को भेजा गया है। जबकि विशेष उल्लेख में उठाये गये 147 सवालों को विभागों को भेजा गया है। एक महीने में इसका जवाब देना होगा।
हालांकि, उन्होंने उपराज्यपाल कार्यालय व अधिकारियों के रवैये पर अफसोस भी जताया। इसमें से कई सवाल दिल्लीवासियों के लिये बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि सरकारी अधिकारियों की तरफ से विधायकों के साथ अवमाननापूर्ण व्यवहार व प्रोटोकाल नियमों के उल्लंघन पर सदन ने एक कमेटी का गठन किया है। पूरे मामले की जांच यह कमेटी करेगी। इसके अलावा सदन की तीन वित्तीय कमेटियों का भी गठन किया गया। दिल्ली विधान सभा ने इसी सत्र में द दिल्ली एप्रोप्रिएशन बिल एक व दो भी पास किया गया।