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दिल्ली: फ्लाईओवर के नीचे छिपा है 18वीं सदी की सराय का इतिहास, विरासत स्थल घोषित करने की तैयारी
Sun, 30 Aug 2026 07:31 AM IST
Rahul Kumar Tiwari
अमर उजाला, ज्योति सिंह, नई दिल्ली
अमर उजाला, ज्योति सिंह, नई दिल्ली
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Sun, 30 Aug 2026 07:31 AM IST
सार
मथुरा रोड स्थित मोदी मिल फ्लाईओवर के नीचे 18वीं सदी की सराय जुलियाना के संभावित अवशेष मिले हैं। पुर्तगाली मूल की डोना जुलियाना डियास दा कोस्टा ने 1720 में इसे बनवाया था। कुआं, लाखौरी ईंटें, कमरे और रसोई इसके ऐतिहासिक महत्व के संकेत देते हैं।
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दिल्ली में इतिहास की खोज
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजधानी की भागती सड़कों, फ्लाईओवर और कंक्रीट के बीच इतिहास की पुरानी कहानी सामने आ रही है। मथुरा रोड स्थित मोदी मिल फ्लाईओवर के नीचे हरियाली के बीच मौजूद खंडहरों को 18वीं सदी की ‘सराय जुलियाना’ के संभावित अवशेष के तौर पर पहचाना गया है।
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खोजकर्ताओं के अनुसार, यह सराय पुर्तगाली मूल की डोना जुलियाना डियास दा कोस्टा ने वर्ष 1720 में बनवाई थी। मुगल दरबार में खास प्रभाव रखने वाली जुलियाना का नाम सराय से जुड़ना इसे ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।
एमसीडी हेरिटेज सेल के सदस्य सचिव डॉ. अकील अहमद के मुताबिक, 17वीं और 18वीं शताब्दी में इस मार्ग से व्यापारी, सैनिक, अधिकारी, तीर्थयात्री और यूरोपीय यात्री आवाजाही करते थे। ऐसे मार्गों पर यात्रियों और उनके पशुओं के ठहरने के लिए कुएं, पेड़, कोस मीनार और सराय बनाई जाती थीं।
अवशेषों से संकेत मिलता है कि सराय जुलियाना छोटा पड़ाव नहीं, बल्कि बड़ा परिसर रही होगी। यहां कम से कम 15 कमरों, पशुओं के लिए अलग स्थान और शाकाहारी व मांसाहारी यात्रियों के लिए रसोई हैं।
एमसीडी हेरिटेज सेल के सदस्य सचिव डॉ. अकील अहमद के मुताबिक, 17वीं और 18वीं शताब्दी में इस मार्ग से व्यापारी, सैनिक, अधिकारी, तीर्थयात्री और यूरोपीय यात्री आवाजाही करते थे। ऐसे मार्गों पर यात्रियों और उनके पशुओं के ठहरने के लिए कुएं, पेड़, कोस मीनार और सराय बनाई जाती थीं।
अवशेषों से संकेत मिलता है कि सराय जुलियाना छोटा पड़ाव नहीं, बल्कि बड़ा परिसर रही होगी। यहां कम से कम 15 कमरों, पशुओं के लिए अलग स्थान और शाकाहारी व मांसाहारी यात्रियों के लिए रसोई हैं।
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कुआं-लाखौरी ईंटें अहम सुराग
खंडहरों के पास मौजूद गोलाकार कुआं इस पहचान की अहम कड़ी माना जा रहा है। इसके ऊपरी हिस्से की मरम्मत सीमेंट से की गई है और लोहे की जाली लगाई गई है, लेकिन अंदर की पुरानी संरचना अब भी दिखाई देती है। कुएं में पानी भी मौजूद है। परिसर के अवशेषों में मुगलकालीन निर्माण में इस्तेमाल होने वाली लाखौरी ईंटें मिली हैं, जो इसकी प्राचीनता की ओर संकेत करती हैं।
खंडहरों के पास मौजूद गोलाकार कुआं इस पहचान की अहम कड़ी माना जा रहा है। इसके ऊपरी हिस्से की मरम्मत सीमेंट से की गई है और लोहे की जाली लगाई गई है, लेकिन अंदर की पुरानी संरचना अब भी दिखाई देती है। कुएं में पानी भी मौजूद है। परिसर के अवशेषों में मुगलकालीन निर्माण में इस्तेमाल होने वाली लाखौरी ईंटें मिली हैं, जो इसकी प्राचीनता की ओर संकेत करती हैं।
बहादुर शाह के दरबार में प्रभाव
डोना जुलियाना डियास दा कोस्टा (1658-1734) पुर्तगाली मूल की महिला थीं और उनका जन्म दिल्ली में माना जाता है। उनके परिवार की पृष्ठभूमि को लेकर इतिहासकारों में अलग-अलग मत हैं। उनके पिता अगोस्टिन्हो डियास दा कोस्टा पुर्तगाली चिकित्सक थे और मुगल दरबार से जुड़े थे।
डोना जुलियाना डियास दा कोस्टा (1658-1734) पुर्तगाली मूल की महिला थीं और उनका जन्म दिल्ली में माना जाता है। उनके परिवार की पृष्ठभूमि को लेकर इतिहासकारों में अलग-अलग मत हैं। उनके पिता अगोस्टिन्हो डियास दा कोस्टा पुर्तगाली चिकित्सक थे और मुगल दरबार से जुड़े थे।
सैन्य अभियानों में जाती थीं
जुलियाना ने शाही परिवार की सेवा करते हुए राजकुमार शाह आलम के परिवार में प्रभाव बनाया। 1707 में शाह आलम के बहादुर शाह प्रथम बनने के बाद दरबार में उनका रुतबा और बढ़ा। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, वह इतनी प्रभावशाली थीं कि बहादुर शाह के सैन्य अभियानों में हाथी पर उनके साथ जाती थीं।
जुलियाना ने शाही परिवार की सेवा करते हुए राजकुमार शाह आलम के परिवार में प्रभाव बनाया। 1707 में शाह आलम के बहादुर शाह प्रथम बनने के बाद दरबार में उनका रुतबा और बढ़ा। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, वह इतनी प्रभावशाली थीं कि बहादुर शाह के सैन्य अभियानों में हाथी पर उनके साथ जाती थीं।
चार गांवों की जागीर के साथ शाही आवास भी मिला था
जुलियाना को चार गांवों की जागीर और दिल्ली में दारा शिकोह का आवास मिलने का उल्लेख मिलता है। 1719 में मुहम्मद शाह के सत्ता संभालने तक उन्होंने पर्याप्त संपत्ति और प्रभाव अर्जित कर लिया था। इसके एक वर्ष बाद 1720 में ओखला में सराय बनवाने का दावा किया जाता है।
जुलियाना को चार गांवों की जागीर और दिल्ली में दारा शिकोह का आवास मिलने का उल्लेख मिलता है। 1719 में मुहम्मद शाह के सत्ता संभालने तक उन्होंने पर्याप्त संपत्ति और प्रभाव अर्जित कर लिया था। इसके एक वर्ष बाद 1720 में ओखला में सराय बनवाने का दावा किया जाता है।