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दिल्ली: किडनी रोग से पीड़ित बच्चों के दिल को बचाएगी सही डाइट, अध्ययन में मिले अच्छे संकेत
Sun, 30 Aug 2026 04:30 AM IST
Vijay Singh Pundir
सिमरन, अमर उजाला, नई दिल्ली
सिमरन, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vijay Singh Pundir
Updated Sun, 30 Aug 2026 04:30 AM IST
सार
यह अध्ययन स्टेरॉयड रेजिस्टेंट नेफ्रोटिक सिंड्रोम (एसआरएनएस) से पीड़ित 4 से 18 साल के 34 बच्चों पर 12 सप्ताह तक किया गया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और कलावती सरन बाल चिकित्सालय के डॉक्टरों के एक अध्ययन में महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है। इस शोध के अनुसार, सही खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि और दवाओं से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चों में हृदय संबंधी रोगों का खतरा कम किया जा सकता है।यह अध्ययन स्टेरॉयड रेजिस्टेंट नेफ्रोटिक सिंड्रोम (एसआरएनएस) से पीड़ित 4 से 18 साल के 34 बच्चों पर 12 सप्ताह तक किया गया।
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एसआरएनएस में किडनी शरीर के लिए जरूरी प्रोटीन को पेशाब के रास्ते बाहर निकालती है, जिससे कुछ बच्चों में कोलेस्ट्रॉल बढ़ा रह सकता है। बाल रोग विभाग की डॉ. वंशिका कक्कड़ ने बताया कि लंबे समय तक बढ़ा कोलेस्ट्रॉल रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचकर दिल की बीमारियों का जोखिम बढ़ाता है। अध्ययन में बच्चों के खानपान में बदलाव किया गया, जिसमें संतृप्त वसा और कोलेस्ट्रॉल कम किए गए। उन्हें रोजाना दो घंटे से कम स्क्रीन समय और कम से कम एक घंटा खेलने या व्यायाम करने की सलाह दी गई।
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जिन बच्चों में खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) का स्तर 160 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से अधिक था, उन्हें डॉक्टरों की निगरानी में एटोरवास्टेटिन दी गई। बाल रोग विभाग के डॉ. अभिजीत साहा ने बताया कि 12 सप्ताह बाद बच्चों के कुल कोलेस्ट्रॉल, एलडीएल और ट्राइग्लिसराइड्स में कमी आई। रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचने वाले संकेतकों में भी सुधार दर्ज किया गया।
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अध्ययन की शुरुआत में करीब 41 प्रतिशत बच्चों का रक्तचाप बढ़ा हुआ था। 12 सप्ताह के जीवनशैली बदलाव और इलाज के बाद इसमें सुधार देखा गया।
दवा के साथ स्वस्थ जीवनशैली भी जरूरी
सुचेता कृपलानी अस्पताल की पैथोलॉजी विभाग की डॉ. सुनीता शर्मा ने कहा, एसआरएनएस से पीड़ित बच्चों के इलाज में केवल दवाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। बच्चों के भोजन की नियमित निगरानी, शारीरिक गतिविधि और वजन व रक्तचाप पर नजर रखना भी जरूरी है। उन्होंने बताया कि एटोरवास्टेटिन दवा बच्चों में सुरक्षित पाई गई और कोई दुष्प्रभाव सामने नहीं आए। माता-पिता को बच्चों की आहार योजना तय करने में डॉक्टर और डाइटीशियन की सलाह लेनी चाहिए। बच्चों को मोबाइल और टीवी से दूर रखकर खेलकूद के लिए प्रोत्साहित करना भी फायदेमंद हो सकता है।