दिल्ली के अपोलो अस्पताल में बड़ी लापरवाही से गई मरीज की जान, इस कारण नहीं दिया 4 घंटे तक दाखिला
परिजनों का आरोप है कि ईडब्ल्यूएस वर्ग का बताने पर उन्हें अस्पताल ने बिस्तर खाली न होने की बात कह दी थी। मरीज चार घंटे तक एंबुलेंस में तड़पती रही। पुलिस के आने पर उसे भर्ती किया गया, लेकिन उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजन देर रात अपोलो अस्पताल में धरने पर बैठ गए थे। ओखला के जामिया नगर स्थित शाहीन बाग निवासी तारीख ने बताया कि उसकी पत्नी 26 वर्षीय नसीमा कुछ दिन से बीमार थी।
तारीख के मुताबिक, मंगलवार शाम वह नसीमा को लेकर अपोलो अस्पताल पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने उसकी स्थिति गंभीर बताते हुए तत्काल एक लाख रुपये जमा कराने को कहा। तारीख का आरोप है कि उन्होंने अस्पताल में खुद को ईडब्ल्यूएस वर्ग (आर्थिक रूप से कमजोर) का बताया तो बिस्तर खाली न होने की बात कह दी गई। इस बीच, एंबुलेंस में करीब चार घंटे तक नसीमा तड़पती रही।
बताया जा रहा है कि उसे ब्रेन में टीबी की शिकायत थी। बाद में जब परिवारवालों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस के आने के बाद ही नसीमा को अस्पताल में दाखिला मिल पाया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। नसीमा को बचाने की कोशिशें बेकार गईं और बुधवार दोपहर करीब एक बजे उसकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि समय पर इलाज मिल जाता तो नसीमा की जान बच सकती थी। परिजनों ने अस्पताल में हंगामा करते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बुलाने की मांग की। पुलिस ने परिजनों को समझाया। परिजनों ने पुलिस को अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ लिखित शिकायत दी है।
हालत थी गंभीर, मिला उपचार अपोलो अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि जब नसीमा को अस्पताल लाया गया था तो हालत काफी नाजुक थी। परिजनों को इसके बारे में बता दिया था। साथ ही मरीज को तत्काल वेंटीलेटर की आवश्यकता होने की बात भी कही, लेकिन कोशिशों के बावजूद डॉक्टर मरीज को बचा नहीं सके। प्रबंधन ने ईडब्ल्यूएस वर्ग का बताने के बाद तवज्जो न देने के आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की है।