रेलवे की तरफ से किए गए तमाम इंतजाम त्योहार में परिवार के साथ मनाने की इच्छा रखने वाले लोगों की तादाद के सामने बौनी साबित हो रही है। स्पेशल ट्रेनों में लोगों को ना कन्फर्म टिकट मिल पा रहा है और न ही अनारक्षित कोच में ही चढ़ पा रहे हैं।
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रेलवे स्टेशन पर सांस लेने तक की जगह नहीं
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शनिवार को स्टेशन पहुंचे लोगों में सिर्फ एक ललक थी कि वह किसी तरह ट्रेन में चढ़कर अपने घर तक की दूरी तय कर लें लेकिन हजारों लोगों को निराश होना पड़ा। ट्रेन में भले ही सीट नहीं मिले, लेकिन अपने घर पहुंचने की आस लिए बड़ी संख्या में लोग रवाना भी हो रहे हैं।
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आनंद विहार बस स्टेशन के बाहर जाम
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दीपावली के पहले छुट्टी वाले दिन भीड़ के आगे रेलवे की तमाम तरह की तैयारी भी नाकाफी साबित हुईं। ट्रेन ही नहीं स्टेशन भी भीड़ से खचाखच भरे दिखे। आरक्षित, अनारक्षित, वातानुकूलित कोच यात्रियों से खचाखच भर कर ट्रेन रवाना हुई।
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सड़कें भी जाम रहीं
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यहां तक कि ट्रेनों के शौचालयों में भी सामान रख कर गेट पर यात्रा करने को लोग मजबूर दिखें। पूर्वांचल दिशा की तरफ रवाना होने वाली ना केवल राजधानी बल्कि सत्याग्रह, सप्तक्रांति, गोरखधाम, वैशाली, पूर्वा, संपर्क क्रांति, सप्त क्रांति महाबोधि, लखनऊ मेल समेत सभी ट्रेनों के अनारक्षित कोच का हाल बुरा है। ट्रेनों के अनारक्षित कोच में तो घंटों लाइन में लगने के बाद ट्रेन के गेट तक पहुंचना मुश्किल दिखा।
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बस स्टेशनों पर लगी भीड़
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बस से ज्यादा कीमत चुका कर यात्रा करने की मजबूरी
ट्रेन में आरक्षित टिकट नहीं मिलने की वजह से बस से लोग 1500 किलोमीटर की दूरी बैठकर तय करने को मजबूर है। दिल्ली के अंतराराष्ट्रीय बस अड्डों पर भी भीड़ उमड़ पड़ी है। हर कोई त्योहार में अपने घर जाने की ललक से स्टेशन व बस अड्डे पहुंच रहा है। भीड़ को देखते हुए बस वालों के भाव भी बढ़े हुए हैं। लखनऊ तक की यात्रा के लिए बस वाले 1800-2000 रुपये तक वसूल रहे हैं। इसी तरह बिहार जाने वालों से 3000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।