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मुजेसर थाने की एफआईआर नंबर-753 से जुड़े हैं डीसीपी की आत्महत्या के तार, जानें क्या है फाइल में मामला

Thu, 15 Aug 2019 09:41 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद Published by: Vikas Kumar Updated Thu, 15 Aug 2019 09:41 AM IST
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DCP vikram kapoor suicide strings linked to FIR number 753 of Mujesar police station
dcp vikram kapoor - फोटो : अमर उजाला

मुजेसर थाने में पिछले साल दर्ज हुए एक मामले में इंस्पेक्टर अब्दुल शहीद का एक नजदीकी रिश्तेदार फंस गया था। उसकी जांच पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने डीसीपी एनआईटी विक्रम कपूर को सौंपी थी। सूत्रों के अनुसार अब इंस्पेक्टर अब्दुल शहीद डीसीपी से इसी जांच को प्रभावित कराकर अपने रिश्तेदार का नाम निकलवाना चाहता था। इसके लिए वह डीसीपी को कुछ आपत्तिजनक कॉल और वीडियो रिकॉर्डिंग के नाम पर ब्लैकमेल कर रहा था। 



पुलिस अभी इस तरह की किसी बात की पुष्टि नहीं कर रही हैं। पुलिस प्रवक्ता सूबे सिंह का कहना है कि मामले की जांच चल रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उस आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
 

DCP vikram kapoor suicide strings linked to FIR number 753 of Mujesar police station
dcp vikram kapoor - फोटो : अमर उजाला
पिछले साल मुजेसर थाने में पुलिसकर्मी पर जानलेवा हमला करने का एक मामला दर्ज हुआ था। सूत्रों के अनुसार उस मामले में इंस्पेक्टर अब्दुल शहीद के एक रिश्तेदार का नाम भी आया था। पहले तो पीड़ित पुलिसकर्मी पर मामले में समझौता करने का दबाव डाला गया, मगर उसने इनकार कर दिया था। जब बात नहीं बनी तो अपने रसूख का इस्तेमाल कर अब्दुल शहीद ने रिश्तेदार को उस मामले से निकलवाने की पूरी तैयारी कर ली थी। 

इसकी भनक लगते ही पीड़ित पुलिसकर्मी पुलिस आयुक्त के समक्ष पेश हो गया और सारी बात बता दी। पीड़ित पुलिसकर्मी ने तो यहां तक कह दिया था कि अगर उसे न्याय नहीं मिला तो वह पुलिस महानिदेशक को इसकी शिकायत करेगा। इस पर पुलिस आयुक्त ने मामले की जांच डीसीपी एनआईटी को सौंप दी थी। 

 
DCP vikram kapoor suicide strings linked to FIR number 753 of Mujesar police station
dcp vikram kapoor - फोटो : अमर उजाला
सूत्रों के अनुसार जांच करीब दो माह पहले सौंपी गई थी। डीसीपी एनआईटी के पास जांच आने के बाद से अब्दुल शहीद उन पर भी अपने रिश्तेदार को मामले से बाहर निकालने का दबाव बना रहा था। बताया जा रहा है कि इस दौरान उसने डीसीपी के साथ बातचीत की कुछ रिकार्डिंग भी कर रखी थीं। सूत्रों का कहना है कि अब्दुल शहीद ने डीसीपी के कुछ ऐसे ऑडियो-वीडियो भी बना लिए थे, जिनसे उनकी छवि खराब हो सकती थी। यह बात जब से डीसीपी को पता चली थी, तभी से वह परेशान थे। पुलिस ने डीसीपी के मोबाइल फोन को भी कब्जे में ले लिया है।

 
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DCP vikram kapoor suicide strings linked to FIR number 753 of Mujesar police station
डीसीपी विक्रमजीत सिंह कपूर - फोटो : अमर उजाला
मंत्री के पैर छूने पर भी चर्चा में आया था इंस्पेक्टर
इंस्पेक्टर अब्दुल शहीद का विवादों से पुराना नाता रहा है। बीते साल अप्रैल में सार्वजनिक स्थल पर एक मंत्री के पैर छूने के कारण भी वह काफी चर्चा में रहे थे। यह मामला सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हुआ था। मामले के अगले ही दिन तत्कालीन पुलिस आयुक्त अमिताभ सिंह ढिल्लो ने कई थानेदारों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया था। उस सूची में सबसे ऊपर इंस्पेक्टर अब्दुल शहीद का ही नाम था। इंस्पेक्टर को थाना एसजीएम नगर प्रभार से मुक्त करते हुए पुलिस आयुक्त ने कोर्ट सुरक्षा में लगाया था।

 
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DCP vikram kapoor suicide strings linked to FIR number 753 of Mujesar police station
dcp vikram kapoor - फोटो : अमर उजाला
एएसआई भर्ती हुए थे विक्रम कपूर 
डीसीपी विक्रम कपूर हरियाणा पुलिस में अक्तूबर 1982 में बतौर एएसआई भर्ती हुए थे। उनके पुराने सहयोगी सेवानिवृत्त डीसीपी पूरण चंद पंवार ने बताया कि अपने कार्यकाल के दौरान विक्रम कपूर की कई बड़े पदों पर तैनाती रही है। वे डीएसपी बनने के बाद आईबी सहित कई महत्वपूर्ण विभागों में तैनात रहे। वर्ष 2017 में डीसीपी मुख्यालय रहते हुए वह आईपीएस पदोन्नत हुए थे। अक्तूबर 2020 में वह रिटायर होने वाले थे। 

 
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