घर बैठे इंटरनेट के माध्यम से मोटी कमाई का लालच दे सात लाख लोगों से 3700 करोड़ रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने मामले में नोएडा के सेक्टर-63 से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। एसटीएफ ने इनके दर्जन भर बैंक खातों में जमा 524 करोड़ रुपये भी जब्त कर लिए हैं। आरोपियों ने धोखाधड़ी की रकम से राजनीति और बॉलीबुड में अच्छी पकड़ बना ली थी।
सिर्फ एक क्लिक पर सात लाख लोगों को लगाया 3700 करोड़ का चूना
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गिरफ्तार आरोपियों की पहचान किशनगंज पिलखुआ निवासी अनुभव मित्तल, कांति नगर मशूलीबडडा विशाखापटनम आन्ध्र प्रदेश निवासी श्रीधर प्रसाद और कमई बरसाना मथुरा निवासी महेश दयाल केरूप में हुई है। श्रीधर फिलहाल नोएडा के सेक्टर-53 बी-53 में रह रहा था। ये लोग सेक्टर-63 एफ-472 में एबलेज इन्फो सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड नाम से फर्जी आईटी कंपनी चला रहे थे। ये लोग ह्यशष्द्बड्डद्यह्लह्म्ड्डस्रद्ग.ड्ढद्ब5 के नाम से ऑनलाइन सोशल मीडिया पोर्टल बनाकर ठगी कर रहे थे।
ग्रेटर नोएडा से बीटेक की पढ़ाई कर चुका अनुभव मित्तल इस फर्जी कंपनी का मालिक और पूरे फर्जीवाड़े का मास्टर माइंड है। एमबीए कर चुका श्रीधर कंपनी का सीईओ है और महेश टेक्नीकल हेड के पद पर कार्यरत था। एसटीएफ के एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि कंपनी ने एक प्राइवेट कंपनी से 12 सर्वर किराए पर ले रखे हैं। ये सर्वर गाजियाबाद के राज नगर इलाके में मौजूद हैं।
सर्वर को सीज कर लिया गया है। लखनऊ फॉरेंसिक लैब के उप निदेशक डॉ. अरूण शर्मा और वरिष्ठ वैज्ञानिक सौरभ गुप्ता के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम सर्वर और कंपनी से वैज्ञानिक साक्ष्य (साइंटिफिक एवीडेंस) एकत्र कर रही है। साथ ही ये टीम सर्वर और कंपनी के कंप्यूटरों से डिलीट किया गया डाटा भी रिकवर करेगी। कंपनी के सर्वर से अभी तक जो जानकारी मिली है उसके हिसाब से ये लोग अब तक सात लाख से ज्यादा लोगों से 3726 करोड़ रुपये की ठगी कर चुके हैं। अब भी इनके खातों में 524 करोड़ रुपये जमा हैं, जिन्हें जब्त कर लिया गया है।
एसएसपी ने बताया कि इस खुलासे में एसटीएफ के एसपी डॉ.त्रिवेणी सिंह , राजीव नारायण मिश्रा और डीएसपी राजकुमार मिश्रा ने धोधाधड़ी का भंडाफो़ड़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आरोपी, लोगों को चार स्कीम (5750 रुपये, 11500 रुपये, 28750 रुपये या 57500 रुपये) के तहत अपना सदस्य बनाते थे। इसके बाद उन्हें अपने सोशल मीडिया पोर्टल पर लॉग इन आईडी देते थे। लॉग इन के जरिए सदस्यों को स्कीम के हिसाब से 25, 50, 75 या 125 लिंक लाइक करने को दिए जाते थे। प्रत्येक लिंक पर लाइक करने के लिए सदस्यों को पांच रुपये का भुगतान किया जाता था। जबकि कंपनी एक रुपये खुद कमीशन के तौर पर रखती थी।