334 करोड़ की हेरोइन पकड़े जाने का मामलाः तस्करों ने बताया इस तरह मौत से लड़कर करते हैं तस्करी
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भारत में हेरोइन अफगानिस्तान व म्यांमार से लंबे समय से आ रही है। अफगानिस्तान से हेरोइन पाकिस्तान होकर भारत आती है, जबकि म्यांमार से मणिपुर होकर दिल्ली आती है। दिल्ली पुलिस अधिकारियों की मानें तो इन दोनों ही जगहों से हेरोइन करीब एक से डेढ़ वर्ष से आ रही है। खास बात ये है कि हेरोइन मणिपुर से बरेली (यूपी) जाती है और वहां से भारत के अन्य हिस्सों में सप्लाई की जाती है। अफगानिस्तान से हेरोइन को भारत लाकर अमेरिका, इंग्लैंड व मध्य पूर्व देशों में भी सप्लाई किया जाता है।
दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अफगानिस्तान से जो हेरोइन आती है उसे कैरियर (हेरोइन लाने वाले, इनमें ज्यादातर अफगानी ही होते हैं) पेट में छिपाकर लाते हैं। वह कैप्सूल के रूप में हेरोइन को निगलकर पेट में रखकर लाते हैं। भारत में मल द्वार से हेरोइन के कैप्सूल को निकालकर आगे सप्लाई करते हैं।
स्पेशल सेल ने जिन तीन अफगानी नागरिक इहसानुल्लाह, मो. आमिन और अब्दुल रज्जाक को गिरफ्तार किया है, उन्होंने खुलासा किया है कि जब तक कैप्सूल उनके पेट में होते थे वह न कुछ खाते थे और न ही पीते थे। आरोपियों ने ये भी बताया कि अगर पेट में कैप्सूल फट जाए तो मौत भी हो जाती है। कैप्सूल फटने से कई अफगानी लोगों की मौत हो चुकी है। इन अफगानी नागरिकों ने बताया कि वह नाइजीरियाई को हेरोइन की खेप देते थे।
मणिपुर निवासी शामूता बानू के पास हेरोइन म्यांमार से आती थी। इस गिरोह को शामूता बानू ही चलाती थी। शामूता बानू को हेरोइन की खेप मणिपुर निवासी एक व्यक्ति देता था। वह व्यक्ति हेरोइन को म्यांमार से मंगाता था। ये हेरोइन को एक केमिकल के जरिए बढ़िया क्वॉलिटी की बनाते थे। शामूता बानू का गिरोह हेरोइन को पश्चिम बंगाल, बिहार, यूपी व दिल्ली में सप्लाई करता था।