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तस्वीरें: लजीज व्यंजनों के लिए जहां रातें रहती थीं रोशन, अब दिन में पसरा सन्नाटा

Sun, 09 Aug 2020 08:50 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 09 Aug 2020 08:50 AM IST
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coronavirus in delhi For delicious dishes where nights used to be illuminated now silence in day
कोरोना काल में दुकानों पर पसरा सन्नाटा - फोटो : अमर उजाला
यहां के पकवान तो लजीज हैं, लेकिन दुकानें बहुत ऊंची नहीं हैं। मार्च से पहले यहां देर रात तक लंबी-लंबी गाड़ियों का तांता लगा रहता था। पकवानों की खुशबू माहौल में ऐसे तैरती थी कि यहां से गुजरने वाले अमूमन खिंचे चले आते थे। देर रात तक गुलजार रहने वाली इन लो प्रोफाइल दुकानों पर कोरोना काल में दिन में ही सन्नाटा पसरा है। अमर उजाला के विवेक निगम और शुभम बंसल की रिपोर्ट....

जगह: जलेबी वाला, दरीबा कार्नर, चांदनी चौक

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जलेबी वाला, दरीबा कार्नर - फोटो : अमर उजाला
स्थापना: 1884
पुश्तैनी दुकान है। पांचवीं पीढ़ी का हूं। इमरजेंसी में भी कोरोना जैसी हालत नहीं बनी थी। अनलॉक में भी दुकानदारी पटरी पर नहीं आई है। 90 फीसदी खरीदार कम हो गए हैं। पहले कभी हमारे यहां प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से लेकर अभिनेेता राजकपूर, रणधीर कपूर तक सुबह पांच बजे उठकर जलेबी खाने आते थे। वहीं खुद स्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के लिए खुद पीएम आवास में जलेबी बनाने जाते थे।
- कैलाश चंद्र जैन, संचालक
 

जगह: बांबे भेल हाउस, कमला नगर।

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बांबे भेल हाउस - फोटो : अमर उजाला
शुरुआत: 1975
दादा द्वारका दास ठक्कर ने काम शुरू किया था। मैं तीसरी पीढ़ी का हूं। अनलॉक के दो महीने बीत गए हैं, लेकिन दुकानदारी 50 फीसदी भी नहीं हो रही है। पहले मेरी गुजराती डिश फाफड़ा, खमन ढोकला, भेल पूरी, शेव पूरी खाने दूर-दूर से लोग आते थे। -राजेश ठक्कर, संचालक
 
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जगह: गुप्ता छोले-भटूरे, आईटीओ

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गुप्ता छोले-भटूरे - फोटो : अमर उजाला
शुरुआत: 1970
कोरोना महामारी से पूरे लॉकडाउन में दुकान भी बंद रही। एक जून से फिर से दुकान खुल गई है। बेटे पंकज के साथ बैठ भी रहा हूं लेकिन अभी स्थिति पहले जैसी नहीं है। 60 फीसदी व्यापार ही रह गया है।
- नाथूराम, संचालक
 
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जगह: गणेश कचौड़ी, लक्ष्मी नगर।

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गणेश कचौड़ी - फोटो : अमर उजाला
शुरुआत: सन 1992।
बेटे नवीष के दुकान चलाता हूं। जनवरी तक काम अच्छा भला चला लेकिन कोरोना महामारी से दो महीने की तालाबंदी रही। सारी लेबर नौकरी छोड़कर चली गई। जून में दुकान दुबारा खुली, लेकिन अभी तक पुरानी दुकानदारी नहीं हो सकी है। स्वाद के दीवाने भी हिचक रहे हैं। कारोबार अभी भी 50 फीसदी के करीब है।
-राकेश गुप्ता, संस्थापक
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