चुनाव में नेता अपनी जीत के लिए अपने काम और जनता पर भरोसे से कहीं ज्यादा वो इनपर भरोसा करते हैं। उनकी हर कही बात को वह इतनी तवज्जो देते हैं कि उनका कहा पूरा होने के लिए वो किसी भी हद तक चले जाते हैं। चुनावी तारीखों का ऐलान होते ही वो अपने सुबह उठने से लेकर रात को सोने जाने तक होने वाले हर एक काम के लिए उस शख्स की सलाह लेते हैं। यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक कि मतदान नहीं हो जाता।
(नोटः स्टोरी में दिखाई गई सभी फोटो केवल प्रतीक के रूप में इस्तेमाल की गई है)
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up election 2017
- फोटो : अमर उजाला
आप सोच रहे होंगे कि ऐसा कौन है जिस पर प्रत्याशी इतना भरोसा करते हैं कि अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए उसका हर कहा मानते हैं। तो वह शख्स होते हैं प्रत्याशियों के गुरुजी यानी ज्योतिषी। प्रत्याशियों की ओर से नामांकन करने से पहले अपने गुरूजी से पूछा जाता है कि वह कब नामांकन करने जाए और कब वह पर्चा खरीदें।
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जब गुरूजी बताते हैं उसी वक्त प्रत्याशी नामांकन के लिए पहुंचते हैं। ज्योतिषियों की राय पर चलने का एक मजेदार किस्सा कुछ ऐसा था कि एक प्रत्याशी तो सुबह-सुबह ऑफिस खुलने से पहले ही कलेक्ट्रेट पहुंच गए। हद तो तब हो गई जब उन्होंने कर्मचारी से रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय को खोलने के लिए चपरासी से रिक्वेस्ट कर डाली।
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चपरासी महोदय ने कुछ दक्षिणा ली और प्रत्याशी को 9:14 मिनट पर कार्यालय में प्रवेश करा दिया। जब रिटर्निंग ऑफिसर अपने कार्यालय पहुंचे तो देखा कि एक पार्टी के प्रत्याशी पहले ही उनके ऑफिस में बैठे हैं।
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एसडीएम ने प्रत्याशी से पूछा कि इतनी जल्दी कैसे आ गए तो प्रत्याशी ने जवाब दिया कि गुरूजी का निर्देश था कि वह समय पर कार्यालय में प्रवेश कर जाएं।