देश के दिल में 6 साल पहले 16 दिसंबर की रात को एक ऐसी घटना हुई थी जिसमें पूरे देश को न सिर्फ आक्रोशित कर दिया था बल्कि लोग सड़कों पर भी उतर आए। उस रात दिल्ली की सड़कों पर DL 1PC 0149 नंबर की बस दौड़ती रही और हैवानियत की सारी हदें पार होती रहीं लेकिन किसी को पता न चला। वो बस जो निर्भया की जिंदगी का काल बन गई आज ऐसी अवस्था में है कि सच में उसे देखकर कोई भी डर जाए। आइए जानें निर्भया गैंगरेप में इस्तेमाल हुई उस बस का आज कैसा है हाल...
जिस बस में हुई थी निर्भया से दरिंदगी, 6 साल बाद ऐसा है हाल, पहचानना भी मुश्किल
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यह बस दिनेश यादव नाम के शख्स की है, इस माामले के बाद दिनेश को कभी अपनी बस वापस नहीं मिली। हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक खबर के अनुसार इस बस को देखकर आपको आज भी यही लगेगा कि जैसे ये खुद निर्भया से होने वाली दरिंदगी की दास्तां चीख-चीख कर आपको बता रही हो। बस के अंदर घुसते ही आपको बस का ओडोमीटर दिखाई देगा जिसमें आपको 2,26,784 किलोमीटर दिखाई देगा। यानी इस कांड से पहले यह बस इतना चल चुकी थी।
बस के डैशबोर्ड और इंजन पर जंग लग चुका है और डैशबोर्ड के पास सीट के नीचे एक बेल्ट का बकल गिरा दिखाई देगा। कुछ महीने पहले तक इसे साकेत कोर्ट परिसर में पार्क कर सुरक्षित रखा गया था। हालांकि बस मालिक के दो-दो बार आवेदन करने पर भी पुलिस ने इस बस को उसे नहीं सौंपा। इसकी वजह ये है कि उस वक्त केस ताजा था और ये बस सड़क पर उतरने के बाद कानून-व्यवस्था में अवरोध पैदा कर सकती है। इस बस को पुलिस ने वारदात के अगले दिन यानी 17 दिसंबर को दिल्ली के संत रविदास कैंप से बरामद किया था, जहां इस केस के 6 में से 4 दोषी रहते थे। यह बस केस में पर्याप्त फॉरेंसिक सबूत जुटाने का माध्यम थी।
पूरे विश्व में देश को शर्मसार करने वाली इस भयानक वारदात के अगले दिन जब लोग जागे तो इस खबर ने उन्हें सन्न कर दिया। इसके बाद पूरे देश में तमाम धरने-प्रदर्शन हुए और लोगों ने मांग की कि इस बस को आग लगा देना चाहिए। निर्भया से हैवानियत इसी बस में हुई थी जिसके कारण यह बस सबूतों के लिहाज से बेहद अहम थी और यही वजह है कि इसे सुरक्षित रखना पुलिस की सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी। लोगों के गुस्से से इसे बचाया जा सके और सारे सबूत पाए जा सकें इसके लिए पुलिस ने इसे बड़े ही गुपचुप तरीके से सुरक्षित रखने का प्लान बनाया। पुलिस ने बेहद ही सीक्रेट तरीके से इस बस को त्यागराज स्टेडियम के बाहर खड़ी बहुत सी बसों के बीच ले जाकर खड़ा कर दिया ताकि किसी को भी शक न हो।
इस बस में कोई प्रवेश न कर सके, यहां से सामान न चुरा सके और इसका तोड़-फोड़ या जला न सके, इसके लिए पुलिस ने सादे कपड़ों में सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए। यह वही जगह थी जहां सड़क के किनारे स्टेडियम के पास खड़ी इस बस की जांच फॉरेंसिक एक्सपर्ट ने की और बाद में इन्हीं सबूतों से 6 लोग दोषी सिद्ध हुए। इन बीते 6 सालों में यह बस साकेत कोर्ट में पार्क रही और बाद में वसंत विहार पुलिस स्टेशन में। इस बस की ऱखवाली पुलिस टीम द्वारा बीते अप्रैल तक की जाती रही। क्योंकि अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया था कि थाने अपने प्रांगण में पड़े सभी पुराने वाहनों को साफ कर दें और कैंपस साफ-सुथरा रखें। बीते अप्रैल में इस बस ने पूरे 6 साल बाद फिर चली और वही रास्ता अपनाया जो उस काली रात(16 दिसंबर 2012) को लिया था। हालांकि इस बार यह बस क्रेन के जरिए इन रास्तों से गुजरी और चुपचाप पश्चिम दिल्ली में वहां पहुंची जहां आज भी वो पार्क है। यह एक डंप यार्ड में पार्क है।