आत्महत्या का अनुष्ठान करने वाले भाटिया परिवार के फंदे पर किसी भी 12वें शख्स के फिंगर प्रिंट नहीं मिले हैं। दिल्ली पुलिस अभी तक घर में किसी बाहरी व्यक्ति की मौजूदगी का अनुमान लगा रही थी, लेकिन फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने इससे इंकार किया है। इसके साथ ही विशेषज्ञों ने पुलिस की थ्योरी पर कई बड़े सवाल भी उठाए हैं।
भाटिया परिवार के किसी भी सदस्य के शरीर, कपड़े और फंदे के अलावा घर में मौजूद अन्य वस्तुओं पर किसी भी अन्य सदस्य के निशान नहीं मिले हैं। बता दें कि 2 जुलाई को मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में पूरे परिवार का पोस्टमार्टम हुआ था।
क्या है एंटी मॉर्टम हैंगिंग
अगले दिन अमर उजाला ने 10 लोगों की ही मौत फांसी से होने की खबर दी थी, जिसे अब पुलिस एंटी मॉर्टम हैंगिंग बता रही है। साथ ही प्रिंयका के शरीर पर मिले लाल निशान और हाथों में मेहंदी का जिक्र भी किया था।
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burari death case
- फोटो : अमर उजाला
इनके शरीर पर मिले हैं निशान
बताया जा रहा है कि ललित, भुवनेश और टीना के शरीर पर नारायणी देवी के अलावा प्रतिभा के हाथों के निशान पाए गए हैं। सूत्रों के अनुसार घर में जितने भी फिंगर प्रिंट मिले हैं, वे सभी भाटिया परिवार के ही हैं। हालांकि टीम का यह अंदेशा लगाना कि बुजुर्ग महिला नारायणी देवी ने आखिर में आत्महत्या की है, सवालों के घेरे में है। पड़ोसियों के अनुसार नारायणी देवी चलने-फिरने में असमर्थ थीं।
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क्या है एंटी मॉर्टम हैंगिंग फॉरेंसिक विशेषज्ञ ने बताया कि भाटिया परिवार के सभी सदस्यों ने आत्महत्या की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी एंटी मॉर्टम हैंगिंग साबित हुआ है। एंटी मॉर्टम हैंगिंग का मतलब जीवित व्यक्ति द्वारा फांसी लगाना होता है। अगर किसी शख्स की हत्या या मौत होने के बाद उसे फंदे पर लटकाया जाता है तो फॉरेंसिक भाषा में इसे पोस्ट मॉर्टम हैंगिंग कहा जाता है। विशेषज्ञ की मानें तो नारायणी देवी का शव अलग कमरे में मिला था। पुलिस को 10 ही शव लटके मिले थे, जिसके बाद अंदेशा था कि नारायणी देवी की हत्या हुई है, लेकिन नारायणी देवी के शरीर पर भी हैंगिंग के निशान मिले हैं।