इस बार सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेले में लोगों को ब्रिटिश राज से लोहा लेने वाले महानायक बिरसा मुंडा के संघर्ष की कहानी, उनकी बायोग्राफी द्वारा देखने सुनने को मिलेगी। इसके साथ ही पलाश के फूलों से चटख रंग की छठा मेला परिसर में झारखंड की संस्कृति के भी दर्शन कराएगी।
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बता दें कि मेले में थीम स्टेट का ताज झारखंड राज्य के सिर सजा है। प्रवेश द्वार के पास ही राजकीय पशु हाथी और पक्षी कोयल के प्रतिरूप दर्शकों का स्वागत करते नजर आएंगे। चौपाल को झारखंड के रूप में रंगने के लिए बैकड्रॉप (पृष्ठभूमि) में पलामू किले के प्रतिरूप से सजाया जा सकता है।
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राज्य के महानायक बिरसा मुंडा के सामाजिक-धार्मिक आंदोलन खड़ा करने और ब्रिटिश राज को तीर कमान से ही उखाड़ फेकने के संघर्ष की कहानी भी नृत्य-नाटिका, कला के माध्यम से दर्शकों तक पहुंचाने की भी तैयारी की जा रही है। सन् 1895 में लगान माफी के लिए आदिवासी नेता बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। इसके लिए दो साल की जेल की सजा भी मिली।
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युवाओं को झारखंड की संस्कृति और बिरसा के योगदान की गाथा बताने के लिए तैयारियों जोरों पर हैं। 1897 से 1900 तक मुंडा ने अंग्रेजों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध भी लड़ा। युवा छात्र के तौर पर उनका दाखिला जर्मन मिशन स्कूल में हुआ, इसलिए उनका नाम बिरसा डेविड पड़ा। मात्र 25 साल की उम्र में वह देश के लिए शहीद हुए। उन्हें अंग्रेजों ने जेल जहर दे दिया था।
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चौपाल को झारखंड के रूप में रंगने के लिए बैकड्रॉप (पृष्ठभूमि) में पलामू किले के प्रतिरूप से सजाया जा सकता है। हालांकि इस प्रतियोगिता में तेलियागढ़ी और बेतला किले के प्रतिरूप भी शामिल हैं। अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेले की तैयारियां जोरों पर हैं। 10 जनवरी को इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक होगी जिसमें आगे की तैयारियां तय की जाएंगी। नोडल अधिकारी सूरजकुंड मेला राजेश जून ने बताया।