आयकर विभाग की सूचना पर पुलिस ने चेकिंग के दौरान ओला कैब से 27.53 लाख रुपये बरामद किए हैं, जिसमें 14.84 लाख की नई करेंसी भी शामिल है। शालीमार गार्डन निवासी फिजियोथैरेपिस्ट और एक कोचिंग सेंटर संचालक रुपये लेकर ओला कैब से दिल्ली जा रहे थे। (सभी फोटोः सौरभ पांडेय/कौशांबी)
बैंक की लाइन से मिला क्लू, तलाशी को पहुंची पुलिस तो 15 लाख के नए नोट समेत मिले 27 लाख
पकड़े गए रुपयों में दो हजार के नोटों की नई करेंसी के अलावा 1000 व 500 की पुरानी करेंसी भी शामिल है। इसके अलावा सौ, पचास, बीस व दस के नोट भी थे। देर रात तक दोनों से पूछताछ जारी थी। सीओ इंदिरापुरम अनिल यादव ने बताया कि आयकर विभाग की ओर से इनपुट दिया गया था कि साहिबाबाद से यूपी गेट के रास्ते मोटी रकम दिल्ली ले जाई जाएगी। पुलिस ने चेकिंग के दौरान एक ओला कैब को रोका और उसमें बैठे दो युवकों के बैग की जांच की। बैग में नोटों की कई गड्डियां थीं। पुलिस ने तुरंत दोनों को हिरासत में लिया और रुपये कब्जे में ले लिए। हिरासत में लिए युवकों में से एक ने अपना नाम डा. लवदीप और दूसरे ने अमित बताया है।
दोनों शालीमार गार्डन में रहते हैं। लवदीप फिजियोथैरेपिस्ट है और अमित कोचिंग सेंटर चलाता है। आयकर विभाग को सूचित किया गया और रुपयों की गिनती शुरू की गई। कैब चालक का नाम पता और अन्य जानकारी लेकर छोड़ दिया गया। आयकर विभाग के डिप्टी डायरेक्टर प्रद्युम्न कुमार सिंह ने बताया कि नोटों गिनती में दो हजार के नोटों में 14.84 लाख रुपये, 1000 के पुराने नोटों में 4.15 लाख, 500 के पुराने नोटों में 4.35 लाख, 100 के नोटों में 3.91 लाख, 50 के नोटों में 25 हजार, 20 के नोटों में 1680 रुपये और 10 के नोट में 1320 रुपये बरामद किए गए हैं। रुपयों को सीज कर जांच की जा रही है कि दोनों युवकों के पास ये रुपये कहां से आए। अगर दोनों युवक रुपयों का स्रोत नहीं बता पाते हैं तो कार्रवाई की जाएगी।
युवकों ने कहा, एक संगठन के रुपये हैं
फिजियोथैरेपिस्ट डा. लवदीप ने बताया कि वह हेल्थ एजुकेशन रिसर्च काउंसिल नाम की एक संस्था में रजिस्ट्रार है। यह संस्था हेल्थ के क्षेत्र में तकनीक को बढ़ावा देने का काम करती है। रुपये कई मेडिकल कॉलेजों की ओर से फीस के रूप में जमा कराए गए हैं। संस्था की सदस्यता लेने के लिए फीस जमा करानी होती है।
बैंक से निकली फ्रैश गड्डियां नहीं, खुद बनाई गड्डियां हैं
नोटों की गिनती के दौरान एक महत्वपूर्ण बात यह सामने आई की 2000 के नोट बैंक से निकली फ्रैश गड्डियों के नहीं है। बल्कि अलग-अलग जगहों से इकट्ठे कर उनकी गड्डियां बनाई गईं है। आयकर विभाग के अधिकारियों को शक है कि यह रुपयों मजदूरों को लाइन में लगाकर उनसे इकट्ठा किया गया हैं। जांच में यह बात साबित होती है तो दोनों युवकों की मुश्किल बढ़ सकती हैं।