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बुलंदी पर पहुंचने के बाद भी अपनों को कभी नहीं भूले जेटली, लंदन में पढ़ रही रसोइये की बेटी
Sun, 25 Aug 2019 09:38 AM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 25 Aug 2019 09:38 AM IST
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फाइल फोटो
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अरुण जेटली बेशक भाजपा के कद्दावर नेता रहे हों, लेकिन बुलंदी पर पहुंचने के बाद भी वह अपनों को कभी नहीं भूले। खासतौर से निजी स्टाफ को, जिनकी मदद के लिए वह हमेशा तत्पर रहते थे। वह अपने सभी सहयोगियों को परिवार का सदस्य मानते थे। जेटली के पारिवारिक सदस्य वरींद्र मेनी ने बताया कि यह अघोषित नियम बन गया था कि उनके सहयोगियों के बच्चे चाणक्यपुरी के उसी कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ते हैं, जहां जेटली के बच्चों ने पढ़ाई की थी।
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यही नहीं, किसी सहयोगी का बच्चा प्रतिभाशाली है और वह विदेश जाना चाहता है तो उसका इंतजाम करने में भी वह पीछे नहीं रहते थे। जेटली के चालक जगन और सहायक पदम सहित करीब दस कर्मचारी तीन दशकों से उनके परिवार से जुड़े हैं। इनमें से तीन के बच्चे अभी भी विदेश में पढ़ रहे हैं।
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अमूमन इस काम पर वह अपनी सालाना कमाई का दस फीसदी खर्च करते थे। इसका नतीजा यह रहा कि जेटली परिवार की रसोई संभालने वाले जोगेंद्र की दो बेटियों में से एक लंदन में पढ़ रही हैं। वहीं, संसद में हर पल साथ रहने वाले सहयोगी गोपाल भंडारी का एक बेटा डॉक्टर और दूसरा इंजीनियर बन चुका है।
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इसके अलावा समूचे स्टाफ में सबसे अहम चेहरा थे सुरेंद्र। वे कोर्ट में जेटली के प्रैक्टिस के समय से उनके साथ थे। घर और ऑफिस से लेकर बाकी सारे काम की निगरानी इन्हीं के जिम्मे थी। जिन कर्मचारियों के बच्चे एमबीए या कोई अन्य प्रोफेशनल कोर्स करना चाहते थे, उसमें जेटली फीस से लेकर नौकरी तक का मुकम्मल प्रबंध करते थे।
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अरुण जेटली का परिवार
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
बेटी सोनाली करती है बच्चों की काउंलिंग, पत्नी देती है गिफ्ट
जेटली के इस काम में परिवार भी साथ खड़ा रहता था। वरींद्र मेनी की मानें तो उनकी बिटिया सोनाली सहयोगियों के बच्चों की पूरी काउंसलिंग करती है। किसको किस विषय की पढ़ाई करनी चाहिए, उसके लिए कौन सा कोर्स उपयुक्त रहेगा, नौकरी कहां व कैसे मिलेगी आदि की जानकारी देने का जिम्मा सोनाली ने उठा रखा है। वहीं, अच्छा प्रदर्शन करने वाले बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए जेटली की पत्नी संगीता भी गिफ्ट देती हैं।
जेटली के इस काम में परिवार भी साथ खड़ा रहता था। वरींद्र मेनी की मानें तो उनकी बिटिया सोनाली सहयोगियों के बच्चों की पूरी काउंसलिंग करती है। किसको किस विषय की पढ़ाई करनी चाहिए, उसके लिए कौन सा कोर्स उपयुक्त रहेगा, नौकरी कहां व कैसे मिलेगी आदि की जानकारी देने का जिम्मा सोनाली ने उठा रखा है। वहीं, अच्छा प्रदर्शन करने वाले बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए जेटली की पत्नी संगीता भी गिफ्ट देती हैं।