एम्स में चंद माह पहले डॉक्टरों ने दिल का ऑपरेशन कर जिस मासूम बेटी को संजीवनी दी, उसे अब संक्रमण होने पर दूसरे अस्पतालों के भरोसे छोड़ दिया। एम्स का कहना है कि वे सर्दी जुकाम या निमोनिया का इलाज नहीं कर सकते। जबकि केंद्र के ही सफदरजंग और आरएमएल अस्पताल के डॉक्टरों का दावा है कि बच्ची के पास वक्त कम है। चूंकि मामला एम्स का है, इसलिए उन दोनों अस्पताल ने भी हाथ पीछे खींच लिए हैं।
दिल का ऑपरेशन करने के बाद एम्स ने मासूम को छोड़ा बेसहारा, कारण जानकर हैरान हो जाएंगे आप
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दो साल की बच्ची की हालत एम्स के इस रवैये की वजह से दिनोंदिन खराब होती जा रही है। बुराड़ी के संत नगर निवासी मासूम बच्ची के पिता कुलदीप कुमार वर्मा के अनुसार दिसंबर 2016 में उन्हें बेटी हुई। यह खुशी दो महीने से ज्यादा देर तक नहीं रह सकी। जन्म के दो महीने बाद निमोनिया के इलाज के दौरान पता चला कि बच्ची के दिल का आकार सामान्य नहीं है।
इसके अलावा उसके दिल के एक हिस्से में रक्त संचार भी नहीं हो रहा है। एम्स के डॉक्टरों ने बच्ची का जल्द ऑपरेशन करने की सलाह तो दी, लेकिन ऑपरेशन की तारीख पांच साल बाद 2023 की दे दी। इसे कम से कम कराने के लिए उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय और एम्स प्रबंधन के हर मुमकिन चौखट पर गुहार लगाई। इसके बाद बीते चार सितंबर को बच्ची का ऑपरेशन हो गया और सात तारीख को डॉक्टरों ने बच्ची को एम्स से डिस्चार्ज भी कर दिया, लेकिन घर जाते ही बच्ची को तेज बुखार हो गया।
बेड शेयर करने से बढ़ रहा संक्रमण का स्तर
वापस एम्स के इमरजेंसी में दिखाने पर डॉक्टरों ने बच्ची को संक्रमण की शिकायत बताई, लेकिन इलाज के लिए किसी दूसरे अस्पताल में जाने की सलाह दी। कुलदीप ने बच्ची को आरएमएल अस्पताल में भर्ती कराया। यहां भी बेड की कमी की वजह से बच्ची को एक और मरीज के साथ बेड शेयर करना पड़ रहा है, जिसके वजह से उसके संक्रमण का स्तर इतना बढ़ गया कि अब वो कुछ खा भी नहीं पा रही है।
‘संक्रमण एम्स में तो इलाज दूसरे अस्पताल में क्यों’
एम्स के डॉ. वी देवगुरू का कहना है कि ऑपरेशन की तत्काल जरूरत को देखते हुए उन्होंने तारीख से पांच साल पहले उसका ऑपरेशन कर दिया, लेकिन उनके पास केवल दो ही बेड हैं, जो सर्जरी वाले मरीजों के लिए होते हैं। सफदरजंग अस्पताल बहुत अच्छा है। वहां इलाज हो सकता है। इस पर कुलदीप का कहना है कि जब संक्रमण की शुरुआत एम्स से हुई फिर अब दूसरा अस्पताल क्यों? सफदरजंग अस्पताल से भी वे मायूस होकर लौटे हैं।