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प्रद्युम्न हत्याकांड के बाद स्कूलों की सुरक्षा पर उठे सवाल, ठहराया ऑटो व वैन को जिम्मेदार

Wed, 13 Sep 2017 09:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Wed, 13 Sep 2017 09:42 AM IST
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after pradyuman thakur murder questions put up on the school security
प्रद्युमन के बचपन की फोटो - फोटो : अमर उजाला

गुरुग्राम के रायन इंटरनेशनल स्कूल में प्रद्युम्न की हत्या के बाद स्कूलों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं लेकिन स्कूल के बाहर भी नौनिहाल सुरक्षित नहीं हैं। स्कूली वाहनों की जांच के नाम पर पुलिस महज खानापूर्ति कर रही है। प्राइवेट ऑटो और वैन संचालक रोजाना हजारों बच्चों की जान अब भी जोखिम में डाल रहे हैं। गुरुग्राम की घटना के बाद पुलिस-प्रशासन और शिक्षा विभाग बच्चों की सुरक्षा को चाक-चौबंद बनाने के दावे कर रहे हैं लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। स्कूली वाहनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त दिशा निर्देश के बावजूद तय मानकों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

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वैन में क्षमता से ज्यादा भरते बच्चे - फोटो : अमर उजाला

मुनाफे के लिए सुरक्षा से खिलवाड़ 
नियमानुसार निजी ऑपरेटर अपने वाहन को स्कूल मानक के अनुरूप बनवाकर पंजीकृत करने के बाद ही स्कूली वाहन के रूप में प्रयोग ला सकता है, लेकिन अधिकांश स्कूल वैन संचालक इस नियम को मानने की जरूरत नहीं समझते। एनआईटी पांच स्थित निजी स्कूल के बाहर कैमरे में कैद की गई स्कूल वैन में क्षमता से कहीं ज्यादा बच्चों को लादा जा रहा था, इसके अलावा इस पर कहीं भी स्कूली वाहन का चिह्न अंकित नहीं था।

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वैन में क्षमता से ज्यादा भरते बच्चे - फोटो : अमर उजाला

तीन की क्षमता, ढोये जा रहे 12 बच्चे  
थ्री सीटर ऑटो में तीन से अधिक सवारियां बैठाने पर ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की तरफ से चालान काट दिया जाता है, लेकिन एक ऑटो में 10 से 12 बच्चों को लादकर ले जा रहे ऑटो वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। बीके चौक पर कैमरे में कैद किए किया गया ऑटो बच्चों की जिंदगी को खतरे में डालकर सड़क पर तेज गति से दौड़ाया जा रहा था।

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वैन में क्षमता से ज्यादा भरते बच्चे - फोटो : अमर उजाला

आग से निपटने के नहीं इंतजाम 
सीटिंग क्षमता के अनुसार प्रत्येक बस में अग्निशम यंत्र अनिवार्य रूप से उपलब्ध होना चाहिए। 12 सीट की बस में 2 किलोग्राम, 20 सीट तक की बस में 5 किलोग्राम और 20 से ज्यादा सीट वाली बसों में 5 किलोग्राम के 2 अग्निशमन यंत्र ड्राइवर केबिन में होने जरूरी, लेकिन प्राइवेट स्कूल बसों व अन्य वाहनों में ऐसा कोई इंतजाम दिखाई नहीं देता।

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स्कूली बच्चे - फोटो : अमर उजाला

आखिर किसके भरोसे हैं आपके बच्चे 
जिन स्कूली वाहनों में आप अपने बच्चों को भेज रहे हैं, उनके चालक और परिचालक के बारे में शायद ही आपको जानकारी होगी। स्कूली वाहनों में सुरक्षा की दृष्टि से यह एक बड़ी चूक है। चालकों के वेरिफिकेशन के नाम पर कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। अधिकांश बच्चे प्राइवेट वाहनों से सफर करते हैं, लेकिन इनके चालकों की वेरिफिकेशन का ख्याल न तो स्कूलों वालों को है और न ही अभिभावक ही सजग हैं।

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