उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र में बुधवार को अतिथि शिक्षकों को स्थायी करने का बिल पेश किया। करीब 4 घंटे तक चली गरमागरम बहस के बाद सदन ने बिल को ध्वनिमत से पास कर दिया। पूरी चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष ने बिल को शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम उठाते हुए इसे कानून बनाने की बात कही। वहीं, विपक्ष के कानूनी पहलुओं पर सवाल उठाते हुए बिल की खामियों का जिक्र किया।
4 घंटे तक चली गरमागरम बहस के बाद अतिथि शिक्षकों को नियमित करने का बिल हुआ पास
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अतिथि शिक्षक व सर्वशिक्षा अभियान के अंतर्गत कार्यरत शिक्षकों की सेवाओं का नियम विधेयक-2017 सदन में पेश करते वक्त कहा कि दिल्ली सरकार की कैबिनेट के पास अधिकार है कि वह अहम मसलों पर स्वतंत्र होकर फैसला ले सकती है। इसी तरह का फैसला नोटबंदी के दौरान प्रधानमंत्री ने भी लिया था। सिसोदिया के मुताबिक, वह प्रधानमंत्री को ही फॉलो कर रहे हैं। लेकिन उनके फैसले से कई लोगों की मौत हो गई। जबकि दिल्ली सरकार शिक्षकों को नियमित करके हजारों परिवारों को जीवन दे रही है।
सिसोदिया ने कहा कि बिल के कानून बनने के बाद 15 हजार शिक्षकों की नौकरी स्थायी हो जाएगी। उपराज्यपाल की तरफ से उठाए गए सवालों पर सिसोदिया ने कहा कि पत्र मिलने के बाद बुधवार को एक बार फिर कैबिनेट की बैठक हुई। उपराज्यपाल ने दो मसलों पर सवाल किया था। एक बिल सर्विसेज से जुड़ा है, जो दिल्ली सरकार के क्षेत्राधिकार में नहीं आता। वहीं, दूसरा इसे तैयार करते वक्त कानून विभाग की सलाह नहीं ली गई।
सिसोदिया ने बताया कि कैबिनेट ने माना कि शिक्षक के बिना शिक्षा की कल्पना नहीं की जा सकती। यह मसला सेवाओं से नहीं जुड़ा है। वहीं, कुछ महीने पहले दिल्ली सरकार ने 150 कश्मीरी माइग्रेेंट को स्थायी किया था। उपराज्यपाल ने उस प्रस्ताव पर कोई एतराज नहीं उठाया। उन्होंने सवाल किया किया कि अगर वह सही था तो हजारों अतिथि शिक्षकों को स्थायी करने का फैसला कैसे गलत हो सकता है। उपराज्यपाल की राय से सरकार इत्तेफाक नहीं रखती।
कानून विभाग व वित्त विभाग से की गई है चर्चा
मनीष सिसोदिया ने कहा कि विधानसभा में बिल पेश होने से कुछ घंटे पहले पत्र भेजकर बिल पर पुनर्विचार करने की बात कह उपराज्यपाल ने विधानसभा का अपमान किया है। विधानसभा में सरकार ने कैबिनेट से पास बिल पेश किया है, जबकि कोई भी विधायक विधानसभा में बिल लाने के लिए स्वतंत्र है। जो बिल लाए गए हैं वह पूरी प्रक्रिया के तहत हैं।