आप के वरिष्ठ नेता कुमार विश्वास बेशक इशारे-इशारे में पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं, पार्टी छोड़कर गए पुराने कार्यकर्ताओं से वापस आने की अपील करते हुए रविवार को दफ्तर में मजमा भी लगाया। लेकिन आप का शीर्ष नेतृत्व फिलहाल वेट एंड वॉच की मुद्रा में है। आप नेतृत्व फिलहाल विश्वास को मिलने वाले समर्थन का आकलन कर रहा है। पार्टी मानकर चल रही है कि दो-तीन बैठकों के बाद विश्वास के संवाद की हवा निकल जाएगी।
यही वजह रही कि रविवार की बैठक पर पार्टी का कोई नेता औपचारिक स्तर पर बात करने को तैयार नहीं दिखा। बस इतना भर बताया गया कि विश्वास आप की पीएसी के सदस्य हैं। वह पार्टी दफ्तर आने के साथ कार्यकर्ताओं से मुलाकात भी कर सकते हैं। इसमें ऐसा कुछ भी नहीं, जिसे पार्टी के खिलाफ माना जाए।
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kumar vishwas
- फोटो : सोशल मीडिया
पार्टी सूत्र बताते हैं कि जून महीने में आप की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में विश्वास को पार्टी नेतृत्व के साथ चलने को कहा गया था। बैठक में कुमार विश्वास के अलावा 36 में से 35 सदस्य विश्वास की दलीलों से राजी नहीं थे। उनसे सिर्फ राजस्थान पर फोकस करने को कहा गया था। सूत्रों की मानें तो शुरुआती कुछ दिनों तक ठीक रहा, लेकिन विश्वास दोबारा सार्वजनिक फोरम पर दूसरे वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ तंज कस रहे हैं।
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कुमार विश्वास
- फोटो : SELF
हालांकि, पार्टी मानकर चल रही है कि विश्वास के कार्यकर्ता संवाद सम्मेलन में दो-तीन बैठकों के बाद न तो इसमें मीडिया की दिलचस्पी रहेगी और न ही कार्यकर्ताओं की। इसके बाद इन बैठकों का कोई मतलब नहीं होगा। संवाद कार्यक्र म धीरे-धीरे नाराज कार्यकर्ताओं का एक गुट भर बनकर रह जाएगा। एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि पार्टी के अलग-अलग फोरम पर कार्यकर्ताओं की बातें सुनी जाती हैं। वाजिब शिकायतों का समाधान भी हो जाता है।