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'लोग आते तो हैं, लेकिन कीमत सुनकर चले जाते हैं', व्यापार मेले में छलक पड़ा कालीन कारीगर का दर्द

Sat, 23 Nov 2019 03:07 PM IST
Prachi Priyam न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Prachi Priyam Updated Sat, 23 Nov 2019 03:07 PM IST
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39th International trade fair Delhi Pragati Maidan Mirzapur carpet workers
व्यापार मेला में मिर्जापुर से आए कालीन - फोटो : G Paul

नई दिल्ली के प्रगति मैदान में लगे व्यापार मेले में वैसे तो देश-दुनिया से आई तरह-तरह की चीजें बिक रही हैं। मेले में खरीदारी करने वालों की होड़ लगी हुई है। कहीं हस्त शिल्प कलाकारों का जीवंत प्रदर्शन देखने के लिए लोग जुटे हुए हैं, तो कहीं दुर्लभ जड़ी-बूटियों को तलाशने में लोगों का समय बीत रहा है। लेकिन इसी बीच मेले में मिर्जापुर से आए कालीन के कारीगरों को इतने बड़े मेले में भी मायूसी हाथ लग रही है। 


 
39th International trade fair Delhi Pragati Maidan Mirzapur carpet workers
व्यापार मेला में घूमने आए कारीगर - फोटो : जी पाल

व्यापार मेले में मिर्जापुर के कालीन की बिक्री कम होने के कारण कारोबारी और कारीगर मायूस हैं। उनका कहना है कि मेले में बाकी सामानों की बिक्री तो खूब हो रही है, लेकिन उनकी कालीनों को कोई नहीं खरीद रहा। कारीगर बताते हैं कि मेले में आए लोग कालीन की तरफ आकर्षित तो हो रहे हैं, लेकिन कीमत सुनकर चले जाते हैं। 
 

39th International trade fair Delhi Pragati Maidan Mirzapur carpet workers
व्यापार मेला में मिर्जापुर से आए कालीन - फोटो : G Paul

कारीगर भोला का कहना है कि इस बार व्यापार मेले के शुरुआती दिनों में काफी लोग कालीन देखने आए, लेकिन खरीदारी कुछ लोगों ने ही की। 40 हजार से 2 लाख कीमत वाले कालीन को कम ही लोग खरीद रहे हैं। कारीगर से बताया कि आलम यह है कि करीब एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी तीन-चार लाख रुपये के ही कालीन बिके हैं।

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39th International trade fair Delhi Pragati Maidan Mirzapur carpet workers
कालीन देखने आ रहे लोग - फोटो : G Paul

भदोही के माधव सिंह गांव के रहने वाले भोला ने बताया कि पहले वह कश्मीर में कालीन बनाते थे, लेकिन अब वह कश्मीर से धागा लाकर अपने गांव में ही कालीन तैयार करते हैं। बीते दस वर्षों से वह प्रगति मैदान में अपने स्टॉल लगा रहे हैं। इस बार उत्तर प्रदेश पवेलियन में उनके तीन स्टॉल लगे हैं। उसने बताया कि अन्य सालों के मुकाबले इस बार व्यापार नहीं के बराबर है।

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39th International trade fair Delhi Pragati Maidan Mirzapur carpet workers
व्यापार मेले में आए लोग - फोटो : G Paul

बिक्री नहीं होने के कारण कालीन के कारीगरों में कुछ शासा उत्साह देखने को नहीं मिल रहा है। वहीं मेला घूमने आए लोगों का कहना है कि उन्हें कालीन और उसपर की गई कारीगरी तो बेहद पसंद है, लेकन उनकी कीमत बजट से बाहर है। लोग कालीन पर इतनी रकम खर्च करने के लिए तैयार नहीं हैं। यही वजह है कि इस बार कालीन कारीगरों को उदासी हाथ लगी है। 

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